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\"हम नाटकबाज\' में बताया जिंदगी के नाटकीय पहलुओं का गूढ़ अर्थ

7 वर्ष पहले
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ओमशर्माद्वारा लिखित निर्देशित नाटक हम नाटकबाज में जिंदगी के नाटकीय पहलुओं का गूढ़ अर्थ बताया गया। मंथन थिएटर ग्रुप के डायरेक्टर ओम शर्मा ने नाटक में भी डायरेक्टर का रोल निभाया। नाटक में बताने की कोशिश की गई कि नाटक कैसे बनता है। कलाकारों ने नाटक में नारी शोषण, भ्रष्टाचार, सफाई हाेने की बात उठाई, वहीं दो हास्य कलाकारों के माध्यम से वर्तमान दर्शकों की नब्ज को यह कहकर टटोला गया कि अब इन कहानियों के बजाय दर्शक हॉरर कहानियों को ज्यादा पसंद करते हैं।

20 मिनट के शॉर्ट नाटक की शुरूआत धती-धती नाच गीत पर कलाकारों के नृत्य के दृश्य के साथ हुई। इसमें उन युवकों पर निशाना साधा गया जो बेफिजूल के गानों पर भी झूमते रहते हैं। 1:10 बजे नाटक शुरू हुआ 1:30 बजे समाप्त हो गया। इसके बाद 20 मिनट की शहीद भगत सिंह पर आधारित कोरियोग्राफी प्रस्तुत की गई। नाटक शहीद भगत सिंह के 107वें जन्मदिवस पर राजकीय महाविद्यालय में मंथन थिएटर ग्रुप की ओर से आयोजित किया गया था। थिएटर के 22 कलाकारों की टीम में से नाटक में 14 कलाकारों ने कोरियोग्राफी में 18 कलाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन महिला प्रकोष्ठ पर्यटन विभाग की ओर से किया गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद प्रधानाचार्य मनमोहन सिंह, महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष अंजू जगपाल पर्यटन विभाग के अध्यक्ष गोपाल शर्मा सहित सभी दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति को सराहा। नाटक निर्देशन में सहयोग विकास चिराग ने दिया। मुख्य किरदारों को निभाया कविता, पलक, उत्तम, विशाल, ट्विंकल, ज्योति, सैम, सौरभ, सुमित, अंकुर, करन, अवि, चिराग, विकास ने।