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सूखी नदी में डूबे प्राण

7 वर्ष पहले
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1 लाख 40 हजार की हर साल मौत

भास्कर नॉलेज

बेगनानदीमें अगर पानी होता तो शायद किसी की जान बचती। नदी सूखी थी इसलिए पलटी बस से ज्यादातर यात्रियों को सकुशल निकाल लिया गया। यात्रियों को बाहर निकालने के लिए बस के शीशे तोड़े गए। अंदर फंसे कुछ यात्रियों ने भी हिम्मत दिखाई। भीषण चीखों के बीच वे भी जान बचाने की कसरत कर रहे थे। उधर, हादसे की वजह बस के स्टेयरिंग फेल होने को बताया जा रहा है। पकड़े गए चालक ने स्वयं पुलिस के सामने यह बात स्वीकार की है। हालांकि असल कारणों की जांच के लिए एफएसएल की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। बस की भी जांच की गई। कुछ सबूत भी जांच टीम के हाथ लगे हैं। फिलहाल मधुबन से आने वाली रिपोर्ट से ही हादसे की असल वजह का पता चलने की बात कही है। पुलिस अब आरोपी चालक से पूछताछ कर रही है।

बरसातीनदी है बेगना: बड़ागढ़गांव के पास बहने वाली बेगना बरसाती नदी है। बरसात के सीजन में ही इस नदी में पानी होता है। ज्यादा बरसात हो तो इसमें उफान तक जाता है। आमतौर पर नदी में पानी नहीं होता। इसी वजह से बस में सवार 46 यात्रियों को बिना जानी नुकसान के बाहर निकाल लिया गया। यात्रियों ने भी यह बात स्वीकार की है कि अगर नदी में कुछ फुट भी पानी होता शायद किसी की जान बच पाती। तब पानी बस में घुस जाने पर सभी का दम घुट जाता। बचाव में भी दिक्कतें आती। खैर, ऐसा नहीं हुआ। नहीं तो मरने वालों की संख्या तीन से कहीं ज्यादा होती।

राहगीरों ने पलटी बस से यात्रियों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया। बस में सवार ज्यादा स्कूल कॉलेज के छात्र-छात्राएं थी। हादसे में मौत का शिकार हुई नन्हेड़ा की सुमन भी कॉलेज छात्रा थी। जबकि बरौली की रेनु बाला स्वास्थ्य महकमे की कर्मचारी बताई जा रही है। चंडीगढ़ पीजीआई में दम तोड़ने वाले मनीत उर्फ नमित के बारे में अभी तक विस्तार से जानकारी नहीं मिल पाई है। रेनु सुमन के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिए गए हैं।

नदीमें खींच लाई मौत : बरौलीकी रेणु पंचकूला के सेक्टर-17 अस्पताल में तैनात थी। हर रोज ड्यूटी पर जाने के लिए वह सीधे ही पंचकूला की बस लेती थी। मगर सोमवार को किसी कारणवश उसे पंचकूला के लिए सीधी बस नहीं मिल पाई। तब उसने शहजादपुर से बस पकड़ने का निर्णय लिया था। इसी कारण वह शहजादपुर की ओर जा रही बस में सवार हो गई। बाद में यह बस बेगना नदी में पलट गई