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80%ऑटो चालकों के पास लाइसेंस तक नहीं

5 वर्ष पहले
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आपकोहैरानीहोगी। ट्विन सिटी की सड़कों पर जो ऑटो आप सरपट दौड़ते देखते हैं, उनमें से 80 प्रतिशत चालकों के पास लाइसेंस नहीं हैं। ऑटो के दस्तावेज तो दूर की बात। यह खुलासा हुआ पुलिस के वेरिफिकेशन अभियान में। यही नहीं, कई चालकों का रिकार्ड अपराधिक किस्म का भी निकला।

असल में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अम्बाला यातायात पुलिस ऑटो चालकों की वेरिफिकेशन कर रही है। इस वेरिफिकेशन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अभी तक जितने भी ऑटो को चेक किया गया, उनमें से कुछ को छोड़कर किसी के पास पूरे दस्तावेज नहीं हैं।

कुछ चालक तो ऐसे हैं जिनकी उम्र ऑटो चलाने की नहीं है। यही नहीं कैंट से बब्याल, महेश नगर, नारायणगढ़ रोड, सिटी से मटेहड़ी शेखां ग्रामीण अंचल में ऑटो दौड़ रहे हैं। पुलिस ऑटो चालकों के मोबाइल फोन नंबर, नाम तथा रिहायश के प्रमाण एकत्रित कर रही है।

ऐसे बनता है ऑटो चालक का लाइसेंस

ऑटोचलाने के लिए लाइसेंस आम लाइसेंस की तरह होता है। इसमें केवल ऑटो को एड कर लिया जाता है। लाइसेंस बनाते वक्त रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी बाकायदा ऑटो को एड करने से पूर्व चालकों का टेस्ट लेती है। तभी उनके लाइसेंस में ऑटो जोड़ा जाता है। आरटीए ऑफिस से जो चालकों को लाइसेंस जारी किए गए थे। उनमें से कई चालकों ने अपने लाइसेंस रिवन्यू तक नहीं कराए।

^ऑटो चालकों की वेरिफिकेशन एक सप्ताह तक और चलेगी। जिनके पास लाइसेंस नहीं हैं, उन्हें लाइसेंस बनाने का समय दिया गया है। राजकुमारवालिया, एसीपी ट्रैफिक, अम्बाला।

अभी तक 4600 ऑटो चेक

पुलिसने पिछले दस दिन से चलाए अभियान में 4600 ऑटो चालकों की वेरिफिकेशन की है। इनमें से ही अधिकांश के पास लाइसेंस तक नहीं हैं। कुछ में तो नंबर तक नहीं हैं। यह अिभयान अभी एक सप्ताह और चलना है।

ऑटोमालिक से क्लेम| ओरिएंटलइंश्योरेंस के डेवलपमेंट अफसर अरविंद सिंह ओबराय कहते हैं कि अगर ऑटो चालक के पास लाइसेंस नहीं है और हादसा हो जाता है तो सवारी को क्लेम नहीं मिलता। ऑटो मालिक से ही रिकवरी कराई जाती है।

तीन की बजाए 10 तक बैठती हैं सवारियां

सबसेबड़ी बात यह है कि दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों में ऑटो में सवारियां बिठाने के जो नियम हैं, उन्हें सख्ती से लागू किया जा रहा है। अम्बाला में ऑटो चालक मनमानी कर रहे हैं। ऑटो में चालक सहित चार लोग ही सफर कर सकते हैं, लेकिन यहां 10 तक सवारियां भरकर ऑटो चलते हैं। स्कूलों में ऑटो चालक इससे भी ज्यादा बच्चे ले जाते हैं।

ऑटोको दिए नंबर रूट| पुलिसने ऑटो चालकों की पहचान के लिए उन्हें अपनी तरफ से नंबर दिए हैं। इसके अलावा उनके रूट भी ऑटो के पीछे लिखे गए हैं ताकि सवारी उसी ऑटो में बैठे। जहां उसने गंतव्य स्थान पर जाना है। यह नंबर रूट पुलिस चालकों को दो-तीन बार अलाट कर चुकी है।

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