स्ट्रीट डॉग पकड़ा, हर्जाने के लिए कोर्ट में होगी अपील
अम्बाला | 20लोगों को काटने वाले स्ट्रीट डॉग को पुलिस और नगर निगम की टीम ने गुरुवार दोपहर कैंट के सदर बाजार में पकड़ लिया। डॉग को टीम ने प्राइवेट डॉक्टर को सौंप दिया है। डॉग के लोगों को काटने के बाद एक बार फिर निगम अधिकारियों की मुसीबतें खड़ी होने वाली हैं, क्योंकि एडवोकेट गौरव राजपूत पहले ही स्ट्रीट डॉग्स के काटने को लेकर कोर्ट में मुवक्किल राजकुमार शर्मा की तरफ से याचिका दायर कर चुके हैं। इसमें जब तक फैसला नहीं होता तब तक निगम को हर्जाना लगाने की वह अपील कर चुके हैं। इस मामले पर 18 फरवरी को सुनवाई होनी है। इसी दिन कोर्ट से डॉग के शिकार हुए लोगों को निगम की तरफ से हर्जाना देने की बात रखेंगे।
बुधवार रात को स्ट्रीट डॉग ने 20 लोगों को काट लिया था। पुलिस निगम की टीम रातभर डॉग को ढूंढती रही। गुरुवार दोपहर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर सुनील दत्त तथा सदर थाना प्रभारी अजीत सिंह ने टीम के साथ सदर बाजार में डॉग की तलाश की। जिधर भी टीम जाती, लोगों का हुजूम भी पीछे लग जाता। आखिर टीम ने सदर बाजार में डॉग को पकड़ लिया। थाना प्रभारी ने बताया कि डॉग को पशु पालन विभाग के हवाले कर दिया है, उसे तेज बुखार था।
रूल बदलने की जरूरत
स्ट्रीटडॉग्स से निजात पाने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल 2001 बदलने की जरूरत है। अभी तक निगम ने कुछ नहीं किया है। संशोधन या नए कानून के लिए सांसद को संसद में प्राइवेट मेंबर बिल लाना होता है। इस पर वोटिंग होती है। लोकसभा में दो-तिहाई वोट पक्ष में डलने के बाद बिल राज्यसभा में जाता है। वहां भी दो-तिहाई वोटिंग पक्ष में होने के बाद बिल हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने के बाद कानून बन जाता है।
प्राइवेट डॉक्टर को सौंपा: अजीत
थानाप्रभारी अजीत सिंह ने बताया कि पागल डॉग को पकड़ने के बाद उसे प्राइवेट डॉक्टर के पास छोड़ा गया है ताकि वह डॉग का इलाज कर सके। डॉग को डॉक्टर ने तेज बुखार बताया है।
विभागको नहीं सौंपा डॉग: डॉ. प्रेम
पशुपालन विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि जब डॉग पागल हो जाता है तो उसे शहर से बाहर छोड़ने की जिम्मेदारी निगम की होती है। ऐसे डॉग अौर लोगों को भी काट सकते हैं।
नसबंदी से रुक सकती है डॉग्स की संख्या
पशुपालनविभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि स्ट्रीट डॉग्स की बढ़ती संख्या इनकी नसबंदी करने से ही रूक सकती है। स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी के लिए विशेष चलता फिरता आपरेशन थिएटर तैयार किया गया है। इसमें डॉक्टरों की टीम पांच मिनट में डॉग्स की नसबंदी कर देती है। नसबंदी के बाद जब उन्हें छोड़ा जाता है तो उनके कान पर नोच का निशान बना दिया जाता है ताकि पता चल सके कि फलां डॉग्स की नसबंदी की जा चुकी है।
पागल डॉग को लेकर जाती निगम टीम।
कांवला के राजकुमार शर्मा ने एडवोकेट गौरव राजपूत से कोर्ट में स्ट्रीट डॉग्स को लेकर याचिका लगाई हुई है। कोर्ट की सुनवाई के बाद निगम ने डॉग्स की नसबंदी के लिए बजट मंजूर किया था, लेकिन एडवोकेट ने फिर से नसबंदी को लेकर याचिका लगाई। साथ ही कहा कि जब तक इस मामले पर सुनवाई नहीं होती तब तक अगर किसी डॉग काटता है तो निगम उसका हर्जाना दे। अभी निगम ने इस मामले पर कोर्ट को अपना जवाब देना है। इधर, डॉग्स के काटने के बाद फिर से सवाल खड़े हो गए कि निगम इन डॉग्स की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।
राहत | एडवोकेट राजूपत पहले दायर कर चुके हैं याचिका, 18 को है सुनवाई