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स्वाइन फ्लू से हैफेड के स्टेनो की मौत

5 वर्ष पहले
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नारायणगढ़| स्वाइनफ्लू के कारण गांव पंजलासा के एक व्यक्ति की पंचकूला/चंडीगढ़ में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह पिछले एक सप्ताह से बुखार, खांसी जुखाम से ग्रस्त था। स्थानीय सरकारी प्राइवेट अस्पताल में सही इलाज मिलने की वजह से उसे पंचकुला के ऑल केमिस्ट अस्पताल में भेजा गया था। मगर वहां से उसे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया जहां उसकी मौत हो गई।

हैफेड पंचकूला में स्टेनों के पद पर कार्यरत 48 वर्षीय जितेंद्र पाल बख्शी की स्वाइन फ्लू के कारण मौत हो गई। जिले में इस साल का यह पहला मामला है, जब किसी ने इस बीमारी की वजह से दम तोड़ा हो। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग भी मुस्तैद हो गया है। मृतक जितेंद्र पाल की प|ी अनुराधा बख्शी ने बताया कि 31 जनवरी को वह पति के साथ बराड़ा गई थी। वहीं पर जितेंद्र को पहली बार बुखार आया था। इसके बाद उनके गले में दर्द की शिकायत हुई जिसकी दवा वह नारायणगढ़ के सरकारी अस्पताल से ले रहे थे, लेकिन हालत में किसी तरह का बदलाव नहीं आया। फिर एक फरवरी को नारायणगढ़ अस्पताल में चेकअप कराया गया। जहां दो दिन तक उनकी दवा चली। उन दिनों जितेंद्र को सांस लेने में दिक्कत रही थी और बुखार-खांसी बढ़ गई थी। जितेंद्र को प्राइवेट अस्पताल दाखिल कराया गया। मगर वहां भी सुधार नहीं हुआ। फिर वह पंचकूला ऑल केमिस्ट अस्पताल पहुंचे जहां जितेंद्र के दो बार डायलेसिस किए गए। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। जितेंद्र के पास एक बेटा रजत है।

^जितेंद्र पाल की मौत स्वाइन फ्लू से हुई है। इसके बाद अहतियात के तौर पर विभाग ने गांव पंजलासा जाकर मृतक के परिजनों और प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर को भी दवा दी। कुल 24 लोगों को दवा दी जा चुकी है। डॉ.विनोद गुप्ता, सीएमओ, अम्बाला।

जितेंद्र पाल का फाइल फोटो।

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