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8 जिलों में 1 नवंबर से केरोसिन पर रोक

5 वर्ष पहले
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प्रदेश को राज्य को केरोसीन मुक्त करने की तैयारियां शुरू

भास्कर न्यूज | राजधानी हरियाणा

प्रदेशको केरोसीन मुक्त करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शुरुआती दौर में एक नवंबर से हरियाणा के 8 जिलों में केरोसिन का वितरण पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इन जिलों में जो परिवार अभी भी केरोसिन का उपयोग कर रहे हैं, उन्हें कैंप लगाकर एलपीजी गैस के कनेक्शन दिए जाएंगे। प्रदेशभर में गांव स्तर पर इस तरह के कैंप लगाए जाएंगे। हरियाणा में करीब 6600 गांव हैं। सामान्यतः प्रत्येक गांव में महीने में दो बार कैंप लगाए जाएंगे, जबकि ज्यादा बड़े गांवों में यह कैंप दो से ज्यादा बार भी लगाए जा सकते हैं। हरियाणा के स्वर्ण जयंती वर्ष के दौरान शुरू की जाने वाली इस मुहिम का उद्देश्य राज्य को केरोसिन मुक्त बनाना है। सरकार का दावा है कि हरियाणा केरोसिन मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य होगा। इसके लिए 31 मार्च, 2017 की डैडलाइन तय की गई है।

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी एसएस. प्रसाद ने बताया कि एलपीजी गैस कनेक्शन देने के लिए गांव स्तर पर कैंप अगले सप्ताह से ही शुरू कर दिए जाएंगे। इनमें पहले कैंप में केरोसिन का उपयोग करने वाले परिवारों का चयन किया जाएगा। अगले कैंप में ऐसे परिवारों को मौके पर ही गैस कनेक्शन जारी किए जाएंगे। एक कनेक्शन पर सरकार को करीब 1600 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इसमें आवेदक को एक गैस सिलेंडर, चूल्हा, रेगुलेटर, गैस पाइप और ब्ल्यू बुक आदि दी जाएगी।

पहले चरण में जिन 8 जिलों को केरोसिन फ्री करने का फैसला किया गया है। उनमें गुड़गांव, झज्जर, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, अम्बाला, यमुनानगर, पंचकूला शामिल हैं। बाकी जिलों में भी केरोसिन वितरण को लेकर काफी नियंत्रण किया जा रहा है। जिन परिवारों ने अभी तक एलपीजी कनेक्शन नहीं लिए हैं, उन्हें इसके प्रति जागरूक करने के लिए अखबार, टेलीविजन आदि के माध्यम से विज्ञापन दिए जाएंगे।

हरियाणा को पूरी तरह से केरोसिन फ्री स्टेट बनाने में कई अड़चनें महसूस की जा रही हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, लेकिन 100 प्रतिशत केरोसिन फ्री स्टेट नहीं हो सकता। हां, 70-80 फीसदी तक लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। इसकी वजह यह है कि गुड़गांव, फरीदाबाद समेत कई शहरों में माइग्रेट लेबर की संख्या ज्यादा है। ये लोग लगातार मूवमेंट करते रहते हैं। इन्हें पकड़ पाना बड़ा मुश्किल होगा। दूसरी दिक्कत यह रही है कि केंद्र सरकार वर्ष 2011 के सोशल-इकॉनोमिक सर्वे में शामिल बीपीएल लिस्ट के मुताबिक ही सब्सिडी देना चाहती है। जबकि राज्य सरकार वर्ष 2007 की स्टेट बीपीएल सूची को लेकर चल रही है। हालांकि यह सूची वर्ष 2011 में अपडेट हुई है,लेकिन केंद्र और स्टेट की सूची में काफी अंतर है। इस समस्या का समाधान निकाल लिया गया है। वह यह है कि ऐसे परिवारों को राज्य सरकार अपने स्तर पर सब्सिडी देने को तैयार हो गई है।

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