अम्बाला। सरकार ने तीन साल पहले जो 97 काॅलोनियां वैध की थी, उन काॅलोनियों में आधे से ज्यादा खसरा नंबर लिस्ट में नहीं थे। जिस कारण लोगों को निगम से एनओसी नहीं मिल रही थी। यही कारण है कि निगम की 11 फरवरी को होने वाली बैठक में छूट गए खसरा नंबरों को लिस्ट में डालने के लिए पार्षद प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजेंगे। इसे एजेंडे में प्रमुखता से रखा गया है। इसके बाद लोगों को राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार ने 2010 में टॉप-वे सर्वे कराया था। सर्वे के दौरान जिन काॅलोनियों में 50 प्रतिशत से ज्यादा घर बन चुके थे तथा वहां पर मूलभूत सुविधाएं थी, उन काॅलोनियों को हुड्डा सरकार ने 2013 में वैध कर दिया था। सरकार ने जो काॅलोनियां वैध की थी, उन काॅलोनियों के खसरा नंबरों की लिस्ट भी जारी की थी। जो खसरा नंबर इस लिस्ट में थे, उन्हें वैध माना गया था।
निगम की एनओसी के बाद ही रजिस्ट्री: सरकार की अधिसूचना के बाद वैध की गई काॅलोनियों में केवल उन लोगों को ही रजिस्ट्री होने लगी, जिन्हें नगर निगम की एनओसी मिलने लगी। जिन लोगों ने अपने घर बनाने थे, उन लोगों का बिना एनओसी के नक्शा पास तक नहीं हो रहा। यही वजह है कि लोग अपने प्लाॅट में निर्माण नहीं कर पा रहे हैं।