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24 साल बाद फिर लगेगी अम्बाला जेल में फांसी

Dainik Bhaskar

Apr 05, 2013, 03:47 AM IST

पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया सहित परिवार के 8 लोगों की हत्या के मामले में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दोषी सोनिया व संजीव की दया याचिका को खारिज करने के साथ सेंट्रल जेल अम्बाला में हलचल शुरू हो गई है।

Ambala look after 24 years in jail hanging
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अम्बाला सिटी. पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया सहित परिवार के 8 लोगों की हत्या के मामले में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दोषी सोनिया व संजीव की दया याचिका को खारिज करने के साथ सेंट्रल जेल अम्बाला में हलचल शुरू हो गई है। हत्याकांड को अंजाम देने वाली रेलू राम की बेटी सोनिया व दामाद संजीव अम्बाला जेल में ही बंद है। जेल प्रशासन सेशन कोर्ट के मार्फत आने वाले राष्ट्रपति कार्यालय के आदेश के इंतजार में है। जेल प्रशासन ने फिलहाल सोनिया व संजीव के व्यवहार को सामान्य बताया है।

प्रदेश में अम्बाला व हिसार जेल में ही फांसी दिए जाने की व्यवस्था होने से इनमें से एक जगह फांसी संभव है। हालांकि अभी तय नहीं कि फांसी किस जेल में होगी। अम्बाला जेल प्रशासन ने फांसी के लिए इंतजामों का जायजा लेना शुरू कर दिया है। हालांकि इस वक्त प्रदेश की किसी जेल में फांसी देने के लिए जल्लाद की व्यवस्था नहीं है। जेल के अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ी तो बाहर से जल्लाद बुलाया जाएगा। इससे पूर्व 1989 में यहां हत्या के मामले में गुलाब सिंह को फांसी दी गई थी।

संपत्ति विवाद में की थी हत्या: बरवाला से निर्दलीय विधायक रहे रेलू राम पूनिया की अरबों की संपत्ति इस हत्याकांड की वजह थी। रेलू राम के पास सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि सहित दिल्ली, फरीदाबाद व हिसार मेंं संपत्ति थी। सोनिया ने अपने 19 वें जन्मदिन पर सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया। सोनिया व संजीव का लगभग एक चौदह वर्षीय बेटा भी है जो उत्तर प्रदेश मे अपने दादा दादी के साथ रहता है।

सोनिया ने राष्ट्रपति को लिखा था पत्र: सोनिया ने वर्ष 2009 में जेल से तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के नाम पत्र लिख कर दया की अपील की थी। राष्ट्रपति ने सोनिया व संजीव की दया याचिका की अपील के पत्र को गृह मंत्रालय के पास कमेंट के लिए भेज दिया था। 17 फरवरी 2009 को गृह मंत्री पी चिदंबरम ने दया याचिका फाइल पर 'बी रिजेक्टेड' लिखा था।

सोनिया व संजीव के गुनाह का सफर
23 अगस्त 2001, सोनिया ने अपने पति संजीव के साथ मिलकर पिता रेलू राम, मां कृष्णा, बहन प्रियंका, सौतेले भाई सुनील, उसकी पत्नी शकुंतला और उनके तीन बच्चों लोकेश (4), शिवानी(2) व प्रीति महज 45 दिन की हत्या कर दी थी। रेलू राम के भाई राम सिंह पूनिया ने कानूनी लड़ाई लड़ी।
31 मई 2004, हिसार के सेशन जज अरविंद कुमार गोयल की अदालत ने सोनिया व संजीव को फांसी दी।
12 अप्रैल 2005, हाईकोर्ट ने दोनों की सजा को उम्रकैद में बदला।
15 फरवरी 2007, को सुप्रीम कोर्ट ने सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई सजा को बरकरार रखा।
23 अगस्त 2007, को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया।
एक सितम्बर 2007 को सेशन जज एसएस लांबा की कोर्ट ने फांसी की सजा के लिए 26 नवम्बर 2007 का दिन मुकर्रर किया लेकिन इस दौरान दोनों ने राष्ट्रपति को दया याचिका भेज दी।

धर्मपाल की फांसी के लिए एक सप्ताह का समय
अम्बाला सिटी . दुराचार के मामले में परिवार के पांच लोगों की हत्या करने को लेकर रोहतक जेल में बंद धर्मपाल की राष्ट्रपति से दया याचिका खारिज हो जाने के बाद अम्बाला जेल में फांसी दी जाएगी।धर्मपाल की फांसी के लिए एक सप्ताह का समय मुकर्रर किया गया है। जेल अधीक्षक शरद कुमार ने इस मामले में निर्देशों पर अगले सप्ताह किसी भी दिन धर्मपाल को फांसी दी जा सकती है।

धर्मपाल ने वर्ष 1991 में दुराचार के मामले में कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी। बाद में पैरोल पर आए सोनीपत निवासी धर्मपाल ने अपने भाई के साथ मिलकर पीडि़ता के परिवार के माता-पिता सहित पांच सदस्यों की हत्या कर दी थी। इस मामले में सोनीपत न्यायालय ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में धर्मपाल के भाई की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।

इस मामले में बीते 14 साल से धर्मपाल की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित थी। बरवाला के पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया व उसके परिवार की हत्या के मामले सेंट्रल जेल में बंद संजीव व सोनिया की फांसी भी अम्बाला में संभव है।

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