चंडीगढ़ | दिल्ली में हार के बाद भाजपा में असंतोष के सुर भी उभरने लगे हैं। खेल मंत्री अनिल विज ने ट्वीट किया- नेता आयात करने के बजाय पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को नेतृत्व सौंपती तो शायद ये हालात नहीं बनते। मीडिया से बातचीत में विज ने कहा कि हालांकि
किरण बेदी अच्छी सामाजिक कार्यकर्ता व कुशल प्रशासक रही हैं, लेकिन उनकी राय में नेता जनता से जुड़ा होना चाहिए।
विज कई मौकों पर ट्वीट व बयानों से नेताओं को संकेत देते रहे हैं। मनोहरलाल सरकार ने अपने 100 दिन पूरे किए हैं, जबकि
केजरीवाल के पास पूरे 5 साल पड़े हैं। जाहिर दोनों सरकारों के कामकाज की तुलना होगी। भाजपा सरकार के अब तक के कार्यकाल को विपक्ष की नजर से देखें तो उपलब्धियां नगण्य हैं जबकि किसान, व्यापारी, कर्मचारी समेत ज्यादातर वर्ग संतुष्ट नहीं हैं। ट्वीट का दूसरा संदेश है कि भाजपा को बाहरी नेताओं के बजाय अपने कार्यकर्ता पर ही भरोसा करना चाहिए।
महत्वपूर्ण फैसलों में भी कॉरपोरेट स्टाइल में सर्वे और अन्य एजेंसियों के बजाय कार्यकर्ताओं के फीडबैक को महत्व दिया जाना चाहिए। इसका तीसरा संदेश यह है कि बड़ी-बड़ी बातें करने और कोरे आश्वासन देने के बजाय अपने चुनाव घोषणा पत्र और वायदों को पूरा करना चाहिए।
इस ट्वीट का चौथा संदेश यह है कि जो लीडर देशभर में चुनाव लड़वाने और जिताने जाते हैं वे खुद अपना चुनाव नहीं जीत सकते। इसलिए देशभर के तमाम कार्यकर्ताओं को चुनाव के वक्त किसी एक प्रदेश में झोंकने के बजाय स्थानीय नेताओं को आगे बढ़ने और जनता का विश्वास हासिल करने का मौका दिया जाना चाहिए।