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हुश्न और सियासत की इस कॉकटेल के दर्दनाक अंत ने हिला कर रख दी राजनीति के चूलें

8 वर्ष पहले
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हरियाणा की राजनीति में अनुराधा बाली उर्फ फिजा ने वर्ष 2008 से करीब दो वर्ष तक उथल-पुथल मचाए रखी। या यह कहें कि प्रदेश के एक हरफनमौला राजनीति परिवार पर बड़ा ग्रहण लगा। साथ ही राज्य में सर्वाधिक समय मुख्यमंत्री पद पर रहे चौधरी भजनलाल जैसे दिग्गज नेता आहत हुए।

हुड्डा सरकार की पहली पारी में अतिरिक्त महाधिवक्ता पद पर तैनात रहते अनुराधा बाली व तत्कालीन उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन बिश्नोई के बीच मोहब्बत इसका प्रमुख कारण रही। यह कहने में भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि चंद्रमोहन बिश्नोई की उभरती राजनीति में यह दौर बड़ा ही कष्टप्रद रहा।

2005 में भजनलाल मुख्यमंत्री नहीं बन सके तो उन्होंने अपने बेटे चंद्रमोहन को उपमुख्यमंत्री का पद बड़ी मशक्कत के बाद दिलाया था। इस प्रकरण में यह पद गंवाना पड़ा। इसके बाद चंद्रमोहन तो 2012 में अपने भाई कुलदीप बिश्नोई की पार्टी हजकां में जाकर संभले हैं।


इस अवधि में उनको राजनीति कैरियर के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी आहत होना पड़ा। परिवार ने एक बार तो बेदखल कर दिया था। यहां तक कि भजनलाल ने बेटा मानने से इंकार कर संपत्ति से बेदखल कर दिया। कुलदीप बिश्नोई ने अपनी नवगठित पार्टी हजकां में उनके लिए कोई जगह होने से इंकार किया। चंद्रमोहन के लिए यारो के यार एवं सरल स्वभाव चर्चित है।

(आगे की स्लाइड में देखें किस तरह राजनीति के दिग्गज को लगा झटका)