(घटनास्थल पर कुछ यूं पलटी बस, राहगीर रूककर देखते हुए।)
शहजादपुर (अम्बाला)। नारायणगढ़ से अम्बाला जा रही हरियाणा रोडवेज की बस स्टेयरिंग फेल होने के कारण अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में तीन छात्रों की मौत हो गई। मरने वालों में बरोली निवासी रेणू बाला, नन्हेड़ा निवासी सुमन व बेलपुरा निवासी नमित शामिल हैं। घटना 8:15 बजे की है। बड़ा गढ़ गांव के पास पुल की रेलिंग तोड़कर बस बेगना नदी में जा गिरी। बस में 50 से ज्यादा यात्री थे। अधिकतर स्कूल, कॉलेज के छात्र-छात्राएं थे। हादसा होते ही आसपास के लोगों ने बस के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला।
दो छात्राओं रेणु बाला व सुमन की मौके पर ही मौत हो गई। लगभग सभी यात्रियों को चोटें आईं हैं। सभी को पहले नारायणगढ़ सरकारी अस्पताल ले जाया गया। वहां से 35 लोगों को चंडीगढ़ पीजीआई व सेक्टर-32 के अस्पताल में रेफर किया गया। पीजीआई में उपचार के दाैरान नमित नामक युवक की मौत हो गई। दर्जनभर यात्रियों का इलाज नारायणगढ़ के ही सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में चल रहा है।
प्रशासनिक अधिकारी लगभग तीन घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंचे। मृतक रेणू की पहचान लगभग दो घंटे बाद हुई। वहीं, सुमन के शव की शिनाख्त उसके जख्मी ग्रामीण ने सरकारी अस्पताल में की। फिर परिजनों को इसकी सूचना दी गई। दोनों के शव परिजनों को सौंप दिए गए। पुलिस ने ड्राइवर के विरुद्ध केस दर्ज कर लिया है।
> स्टेयरिंग फेल होने से हादसा
हादसे का जिम्मेदार बस चालक काबू, बोला-बस का स्टेयरिंग फेल होने के कारण हुआ हादसा।
> एफएसएल टीम ने दौरा किया
जांच के लिए एफएसएल की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। बस की भी जांच की गई।
> ज्यादातर स्टूडेंट्स थे बस में
बस में सवार ज्यादातर स्कूल व कॉलेज के छात्र-छात्राएं थीं। हादसे का किसी को अंदेशा तक नहीं था।
> 46 यात्रियों को निकाला
नदी सूखी होने के कारण बस में सवार 46 यात्रियों को बिना जानी नुकसान के बाहर निकाल लिया गया।
बेगना नदी में अगर पानी होता तो शायद किसी की जान न बचती। नदी सूखी थी इसलिए पलटी बस से ज्यादातर यात्रियों को सकुशल निकाल लिया गया। यात्रियों को बाहर निकालने के लिए बस के शीशे तोड़े गए। अंदर फंसे कुछ यात्रियों ने भी हिम्मत दिखाई। भीषण चीखों के बीच वे भी जान बचाने की कसरत कर रहे थे। उधर, हादसे की वजह बस के स्टेयरिंग फेल होने को बताया जा रहा है। पकड़े गए चालक ने स्वयं पुलिस के सामने यह बात स्वीकार की है। हालांकि असल कारणों की जांच के लिए एफएसएल की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। बस की भी जांच की गई। कुछ सबूत भी जांच टीम के हाथ लगे हैं। फिलहाल मधुबन से आने वाली रिपोर्ट से ही हादसे की असल वजह का पता चलने की बात कही है। पुलिस अब आरोपी चालक से पूछताछ कर रही है।
बरसाती नदी है बेगना
बड़ागढ़ गांव के पास बहने वाली बेगना बरसाती नदी है। बरसात के सीजन में ही इस नदी में पानी होता है। ज्यादा बरसात हो तो इसमें उफान तक आ जाता है। आमतौर पर नदी में पानी नहीं होता। इसी वजह से बस में सवार 46 यात्रियों को बिना जानी नुकसान के बाहर निकाल लिया गया। यात्रियों ने भी यह बात स्वीकार की है कि अगर नदी में कुछ फुट भी पानी होता शायद किसी की जान न बच पाती। तब पानी बस में घुस जाने पर सभी का दम घुट जाता। बचाव में भी दिक्कतें आती। खैर, ऐसा नहीं हुआ। नहीं तो मरने वालों की संख्या तीन से कहीं ज्यादा होती।
राहगीरों ने पलटी बस से यात्रियों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया। बस में सवार ज्यादा स्कूल व कॉलेज के छात्र-छात्राएं थी। हादसे में मौत का शिकार हुई नन्हेड़ा की सुमन भी कॉलेज छात्रा थी। जबकि बरौली की रेनु बाला स्वास्थ्य महकमे की कर्मचारी बताई जा रही है। चंडीगढ़ पीजीआई में दम तोड़ने वाले मनीत उर्फ नमित के बारे में अभी तक विस्तार से जानकारी नहीं मिल पाई है। रेनु व सुमन के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिए गए हैं।
नदी में खींच लाई मौत
बरौली की रेणु पंचकूला के सेक्टर-17 अस्पताल में तैनात थी। हर रोज ड्यूटी पर जाने के लिए वह सीधे ही पंचकूला की बस लेती थी। मगर सोमवार को किसी कारणवश उसे पंचकूला के लिए सीधी बस नहीं मिल पाई। तब उसने शहजादपुर से बस पकड़ने का निर्णय लिया था। इसी कारण वह शहजादपुर की ओर जा रही बस में सवार हो गई। बाद में यह बस बेगना नदी में पलट गई। सुमन की तरह रेनु की पहचान भी काफी देर से हुई। रेनु की मौत पर परिजनों का विलाप किसी से देखा नहीं गया।
6 घंटे बाद हुई सुमन की पहचान
कॉलेज छात्रा सुमन की पहचान छह घंटे तक नहीं हो पाई। हादसे में उसका चेहरा बुरी तरह कुचला गया था। पहचान को लेकर कोई दस्तावेज भी उसके पास से नहीं मिला था। परिजनों ने बताया कि सुमन का चेहरा काफी खराब हो चुका था इसलिए उसे कोई पहचान नहीं पाया। उसकी पहचान के लिए लोग कसरत रहे। पर कामयाबी नहीं मिली। उसकी पहचान तब हुई जब हादसे में जख्मी हुए नन्हेड़ा के ही एक युवक ने सुमन के बस में सवार होने की बात कही। उसने बताया उसके गांव की सुमन बस में सवार थी। तब पुलिस ने पहचान के लिए परिजनों को सूचना दी। तब परिजनों ने अपनी बेटी की पहचान की। बेटी की लाश देखते हुए परिजनों में कोहराम मच गया।
हादसे में ये हुए घायल
बरौली के बलदेव सिंह, सुखवंत कौर, टपरियां के अमित कुमार, सढ़ौरा के भवनेश कुमार, नारायणगढ़ के सुदेश कुमार, कानपुर के आकाश, बरौली के राहुल, नारायणगढ़ के सर्वजीत सिंह, टोबा की आशा, हवेली की सुरेंद्र कौर, बल्लोपुर के मोहित कुमार, अम्बाला छावनी के हंसराज, भूरेवाला गांव का रामेश्वर दास, सढ़ौरा का अमन कुमार, बरौली का राहुल, फिरोजपुर की रानी, भूरेवाला का सुरेंद्र सिंह, नारायणगढ़ का गगन,गुलशन,बबीता, मंजू, अमित कुमार, कुणाल गर्ग, दिवनेश कुमार, बेरखेड़ी का बलविंद्र सिंह, सुल्तान पुर का शिवकुमार, पतरेहड़ी का सोहन, हमीदपुर का शुभम, नन्हेड़ा का रोहित, बिहार का नीतेश,खानपुर की दीक्षा, हुसैनी की रेनु व नारायणगढ़ के विजय कुमार व रितिका।
भास्कर नॉलेज : 1 लाख 40 हजार की हर साल मौत
> विश्व में सड़क दुर्घटनाओं में सर्वाधिक मौत भारत में होती है। वर्ष 2012 में भारत में 1 लाख 40 हजार लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई जबकि लगभग 5 लाख लोगों को इस कारण गंभीर दीर्घकालीन क्षति या अपंगता सहनी पड़ी।
> विश्वभर में कुल रजिस्टर्ड मोटरगाड़ियों में से मात्र एक प्रतिशत भारत में हैं, जबकि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में से नौ प्रतिशत भारत में होती है। वर्ष 2005 में चीन में 108000 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में दर्ज हुई थीं (जो उस समय विश्व में सर्विधिक थीं) जबकि भारत में ऐसी 98000 मौतें दर्ज हुई थीं। उसका बाद के पांच वर्षों में (2012 तक) चीन ने इन मौतों को 70000 तक कम कर दिया जबकि भारत में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ते हुए 140000 की संख्या को पार कर गया। इस तरह जहां मात्र पांच वर्ष पहले चीन में भारत से अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती थीं, वहां आज सड़क दुर्घटनाओं में भारत से आधी मौतें होती हैं।
> भारत में हादसों में जान गंवाने वालों में कम उम्र के बच्चे विशेषकर स्कूली बच्चे शामिल हैं। एक गैर-सरकारी संस्था के मुताबिक, 2013 से सड़क हादसों में करीब 70 बच्चों को जान गंवानी पड़ी है और कई घायल हुए हैं। जनवरी 2013 से जुलाई 2014 के बीच 11 अलग-अलग घटनाओं में 60 बच्चे घायल हुए हैं।
कुछ ऐसे बयां किया मौत का मंजर
अचानक लगे ब्रेक
घायल गुलशन ने बताया कि वह बस में बैठा था। बेगना नदी पर अचानक ब्रेक लग गए। इसके बाद बस नदी में जा गिरी। तब वह बेहोश हो गया जिसके बाद उसे कुछ मालूम नहीं हो पाया। हादसे की वजह क्या रही मुझे मालूम नहीं है।
धमाके की आवाज सुनी
अमित ने बताया कि उसने एक धमाके की आवाज सुनी थी। तब उसे पता नहीं चल पाया कि क्या हुआ। बस नदी में गिरने के बाद तो उसे कुछ पता ही नहीं चल पाया। बस पलटने के बाद उसने चीख पुकार जरूर सुनी।
पीछे सीट पर बैठा था
गगन ने बताया कि वह बस में सवार होकर साहा जा रहा था। तब वह बस में पीछे वाली सीट पर बैठा था। हादसे के दौरान उसे धमाके की आवाज सुनी थी। नदी में बस गिर जाने के बाद क्या हुआ उसे कुछ मालूम नहीं हुआ। बाद में वह बेहोश हो गया।
मुझे लोगों ने बाहर निकाला
रोहित ने बताया कि उसे भी यह मालूम नहीं कि हादसा किस वजह से हुआ। बस पलट जाने के बाद उसने यात्रियों के चाीखने चिल्लाने की आवाजें सुनी थी। इसके बाद क्या हुआ कुछ मालूम नहीं। बस इतना याद है उसे लोगों ने बाहर निकाला।
अचानक बड़ा सा झटका लगा, सबने शोर मचाया
नारायणगढ़ से बिहार जाने के लिए बस में सवार हुए नीतेश ने बताया कि हादसे के दौरान जोरदार झटका लगा था। इसके बाद तो उसे बस गहरी नदी में पलटी नजर आई। बचने के लिए उसने भी शोर मचाया। तब उसे कुछ लोगों ने सकुशल बाहर निकाला
लापरवाह बस चालक को गिरफ्तार किया
^लापरवाही के आरोप में बस चालक सुरेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। हादसे के सही कारणों का पता लगाने के लिए एफएसएल की टीम जांच कर रही है। आरोपी चालक ने शुरूआती पूछताछ में हादसे की वजह स्टेयरिंग फेल होना बताया है। उसने दिए बयान में यह बात बताई है। मामले के तमाम पहलुओं की गंभीरता से जांच हो रही है। जल्द ही असल वजह सामने आ जाएगी। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिया गया है।
जयप्रकाश दहिया, एसएचओ, नारायणगढ़।
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