हाईप्रोफाइल तेजाब कांड : पीडि़त ही आरोपी को पहचानने से मुकरे

8 वर्ष पहले
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अम्बाला सिटी. हाईप्रोफाइल तेजाब कांड में पुलिस की मेहनत बेकार हो गई। वे तमाम युवक उस आरोपी को ही पहचानने से इंकार कर गए जिनके बिगड़े चेहरे अब भी जुर्म की कहानी बयान कर रहे हैं। झुलसे युवकों ने अदालत के सामने यह तो स्वीकार किया कि तेजाब गिरने के कारण ही उनके चेहरे झुलस गए। मगर पुलिस द्वारा गिरफ्तार शख्स वह आरोपी नहीं है जिसने उन पर तेजाब फेंका।

पीडि़तों की इस दलील का आरोपी को फायदा मिला जिसके कारण वह रिहा हो गया। इस कांड के बाद लोग भी युवकों के झुलसे चेहरे देखकर सन्न रह गए थे।


डेढ़ साल पहले वारदात : वारदात 6 मार्च 2012 को बलदेव नगर में हुई थी जब 6,000 रुपए की कमेटी को लेकर कुछ युवकों में विवाद हो गया था। बलदेव नगर में मनियारी की दुकान करने वाले अनित कुमार ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि यहीं के कुछ युवक आपस में कमेटी डालते थे जिसमें अजय भी शामिल था। 6 मार्च को जब अजय से अनित का भाई राजेश कुमार कमेटी लेने गया तो उसने गाली-गलौज शुरू कर दिया।

कमेटी डालने वाले साहिल, गुरचरण सिंह, जतिन, संदीप कुमार, ललित कुमार, राजिंद्र सिंह व दीपक कुमार भी वहां पहुंच गए। अनित का आरोप है कि तभी सभी युवकों को गालियां देते हुए अजय घर की छत पर चढ़ गया। उसने वहीं से तेजाब से भरी कैनी नीचे खड़े युवकों पर उड़ेल दी।

अजय की हरकत से अनजान युवकों के चेहरे तेजाब से झुलस गए थे। एक युवक की तो आंख में तेजाब चला गया था जबकि अनित की नाक ही झुलस गई। तेजाब के कारण सभी युवक 20 से 40 फीसदी तक झुलस गए थे।


जांच में बदल गया जुर्म

पुलिस ने पहले अनित कुमार की शिकायत पर आरोपी अजय कुमार के खिलाफ 9 युवकों की हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया था। मगर जांच में जुर्म की तहरीर बदल गई। जांच में ही पुलिस ने आरोपी अजय कुमार के खिलाफ हत्या के प्रयास की जगह गंभीर चोट मारने का केस दर्ज किया था। यहीं से पूरे केस की बुनियाद कमजोर हो गई। जांच में पुलिस ने पुख्ता सबूत जुटाने का भी दावा किया था। मगर पीडितों की इनकारी के कारण पुलिस की मेहनत पर पानी फिर गया।


॥आरोपी के खिलाफ पुलिस के पास पर्याप्त सबूत नहीं थे। सभी पीडि़त उसे पहचानने से इंकार कर गए। आरोपी का जुर्म साबित होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। अजय कुमार की रिहाई तय हुई है। फैसला होने के साथ ही केस पर सुनवाई भी बंद हो गई है।
सुनील आनंद/शैलेंद्र पाल, पैरवीकार, बचाव पक्ष