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आखिर क्यों कुछ लोग खंभे पर लटके हैं तो कुछ ट्रांसफार्मर में फंसे नजर आए !

8 वर्ष पहले
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अम्बाला. नगर निगम के चुनाव की दुदुंभी बज चुकी है। सेनापति अपने बंकर से निकल आए हैं। कुछ सैनिक पहले से ही तैयार थे। कोई हाथ जोड़ता हुआ खंभे पर लटका हुआ नजर आ रहा था तो कोई ट्रांसफार्मर और खंभे के बीच अटका हुआ दिखाई दे रहा था। लिखा था, सेवा में सदैव तत्पर, एकता, अखंडता और शांति का प्रतीक। सेवा में किसके लिए तैयार रहे मालिक जाने।

किसी ने जगराता कराया तो कोई जगराते का अतिथि बना। यानी पूरा गणित चुनाव का। अब चुनाव लड़ाने वालों के लिए एक सवाल बड़ा तकलीफ दे रहा है। वह है महापौर का। अम्बाला के बीस पार्षदों में से एक एससी महिला का महापौर के लिए चयन होना है। यदि बहुमत कांग्रेस को मिला और एससी महिला पाषर्द नहीं बनी तो..। इसी प्रकार बहुमत भाजपा को मिला और उसकी एक भी एससी महिला पार्षद नहीं बनी तो महापौर का क्या होगा।

टिकट तो तीन खिड़कियों से ही मिलेंगे

भाजपा और इनेलो ने तो साफ कर दिया है कि उसके प्रत्याशी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लड़ेंगे। कांग्रेस की स्थिति ऐसी नहीं है। वहां यदि किसी व्यक्तिपर सहमति बन गई तो उसे कांग्रेस समर्थित माना जाएगा। टिकट तीन खिड़कियों से मिलेंगे। कुमारी सैलजा, विनोद शर्मा और निर्मल सिंह। जिसके लिए तीनों खिड़कियां बंद मिलेंगी, उसके लिए चौथा दरवाजा खुला मिलेगा। यह दरवाजा है बागी का। यही बागी पूरे चुनाव में आकाओं के गणित बिगाड़ेंगे और खुद मजे लेंगे।

इस चुनाव में जनता पूरे मजे लेगी। उसे इंतजार रहेगा दरवाजे पर आकर चरण वंदना करने वालों का। ये चरण वंदक ढाई साल तक कहीं नजर नहीं आए। बिजली ने तड़पाया, गंदगी ने कहर बरपाया, कुत्तों ने काट खाया, गड्ढों ने पांव मुचकाया, स्ट्रीट लाइट ने सताया तब कोई भी बंदा जनता के बीच खुलकर सामने नहीं आया। अब एक बार फिर नगर की सत्ता जनता के हाथ में है। जनता अपना बेशकीमती वोट ऐसे ही नहीं दे देगी। गली-मोहल्लों में टंगे बोर्डो से प्रभावित नहीं होगी। उसे काम चाहिए।

संविधान का सम्मान करेंगे

महापौर का चुनाव तो आखिर कराना ही पड़ेगा। संविधान यह नहीं कहता कि सदन में बोर्ड किसका बने। संविधान कहता है कि नगर निगम चलाने के लिए 19 पार्षद और महापौर चाहिए। इसके लिए वार्डो का बंटवारा हो चुका है। अब रणनीतिकार इस मसले पर कानून की किताबें पलटने लगे हैं। वे खुद चकित हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता बल्केश वत्स का कहना है कि यह सवाल वाकई में किसी पहेली से कम नहीं है, लेकिन हम संविधान का सम्मान करेंगे।