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शराब के खिलाफ महिलाओं ने उठाया था झंडा, सरकार ने दे दिया झटका

9 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. हुड्डा सरकार नई आबकारी नीति से भले ही रेवेन्यू बढ़ाने का दावा कर रही हो लेकिन यह नीति प्रदेश की उन महिलाओं के लिए बड़ा झटका है जो शराब का विरोध कर रही हैं। अब तक गांवों में सिर्फ देसी शराब के ठेके होते थे लेकिन अगले दो वित्त वर्षों के लिए सरकार ने वहां अंग्रेजी शराब के ठेके खोलने का रास्ता भी साफ कर दिया है।

लेकिन इस तथ्य पर न तो सरकार का ध्यान है और न विपक्ष का। विडंबना देखिए, यह नीति उस विभाग ने बनाई है जिसकी मुखिया किरण चौधरी उन्हीं स्व. बंसी लाल की पुत्रवधू हैं जिन्होंने प्रदेश में शराबबंदी लागू कर महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने की पहल की थी।


गांवों के ठेके बंद करने की मुहिम छेडऩे वाली करनाल के डेरा संजय नगर गांव के महिला जागरूक मंडल की प्रधान पदानी कौर भी नई नीति से आहत हैं। वह कहती हैं, 'इसने मेरी जैसी उन सभी महिलाओं की मुहिम को गहरा धक्का पहुंचाया है जो अपने घर-गांव को बचाने के लिए शराब ठेकों का विरोध कर रही थीं।Ó


कैथल के माजरा गांव की महिला कार्यकर्ता संतोष कहती हैं, 'शराबी पति हैवान की तरह होता है। वह पूरे परिवार को तबाह कर सकता है। शराबी पति से दुखी महिलाओं की तो हमारे यहां सुनवाई भी नहीं होती।Ó


गौरतलब है कि कैथल जिले के पीडल समेत प्रदेश के कई गांवों में महिलाएं शराब ठेके बंद कराने को लेकर आंदोलन कर चुकी हैं।