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चार महीने पहले ही बिछने लगी बिसात

8 वर्ष पहले
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अम्बाला. द पोस्टल एंड आरएमएस बैंक की वार्षिक आम सभा में रविवार को हुआ हंगामा असल में नवंबर में प्रस्तावित निदेशक मंडल के चुनावी संघर्ष का ट्रेलर भर था। 23 नवंबर को निदेशक मंडल का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा है। पांच राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के 15 हजार बैंक सदस्य नया निदेशक मंडल चुनेंगे। सेंट्रल रजिस्ट्रार ने अभी रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त नहीं किया है, अलबत्ता चुनावी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

इस बार भी मनजीत सिंह और एसपी गोयल समर्थित पैनलों के बीच मुकाबला होने की संभावना है। इस समय दोनों पक्ष पैनल तैयार करने की माथापच्ची में लग गए हैं। बैंक निदेशक का चुनाव लडऩे के लिए काफी धन-बल और दमखम की जरूरत पड़ती है। दिलचस्प है कि दोनों पैनलों के मुखिया अम्बाला से हैं। पिछले साल तीन निदेशक अम्बाला से बने थे। इस बार भी यहां काफी टिकटार्थी हैं। बैंक का मुख्यालय अम्बाला में होने की वजह ऐसा है।

बैंक के करीब 15 हजार सदस्य हैं। सबसे ज्यादा 6,500 सदस्य दिल्ली से हैं। पंजाब व चंडीगढ़ से 3,800 और हरियाणा से 3,500 सदस्य हैं। हिमाचल व जम्मू-कश्मीर से एक हजार से कम सदस्य हैं। मौजूदा निदेशक मंडल में 5 निदेशक दिल्ली से, 3 पंजाब से, 3 हरियाणा के और एक चंडीगढ़ से जीत कर आए थे। इस बार गोयल गुट पंजाब व यूटी से पांच, दिल्ली से चार और हरियाणा से तीन उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहा है। दूसरी तरफ, मौजूदा निदेशक मंडल ने दिल्ली में ब्रांच खुलवाने को अनुमति दिलाकर दिल्ली के वोटरों को रिझाने के लिए तुरुप का पत्ता फेंका है।

कुल 12 निदेशक बने थे, इनमें से दो नौकरी से रिटायर हो चुके हैं। शेष बचे 10 में से पांच की नौकरी तीन साल से कम बची है। बैंक के निदेशक मंडल का चुनाव पांच वर्ष का होता है। अब देखना यह है कि जिनकी रिटायरमेंट नजदीक है, क्या वे दोबारा चुनाव लडऩे मैदान में उतरेंगे। चेयरमैन मनजीत सिंह 2016 में, वाइस चेयरमैन निरंजन सैनी इसी साल अगस्त में, बीडी लखनपाल 2015 में, महावीर सैनी व हरिंदर सिंह 2014 में रिटायर होंगे। उम्मीद है नए चेहरे मैदान में दिखेंगे।