पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

गोपाल दास ने मौन धारण किया, कल भू-समाधि लेंगे

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

करनाल. गोचरान भूमि को कब्जा मुक्त करवाने को लेकर पिछले दो दिनों से लघु सचिवालय परिसर में आमरण अनशन पर बैठे संत गोपालदास ने शनिवार को अनिश्चित कालीन मौन धारण कर लिया।

उन्होंने गो भक्तों को सभी आवश्यक निर्देश लिखकर दिए। गो भक्त उनके लिखित आदेशों पर तत्परता के साथ कार्रवाई करते रहे। संत गोपाल दास ने लिखकर कहा कि वे सोमवार को भू-समाधि लेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी जिला प्रशासनिक अधिकारी तानाशाही पूर्वक रवैए अपनाकर गोचरान भूमि की बोली करवा रहे है। जिन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। संत गोपाल दास ने इशारों में बताया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा। इसके लिए चाहे उनकी जान ही क्यों न चली जाए। वे हर कुर्बानी देने को तैयार हैं।

संत गोपाल दास ने सुबह आठ बजे मौन धारण करते ही सभी निर्देश लिखित में गो भक्तों को दिए। उन्होंने गो भक्तों से कहा कि वे सोमवार को भू समाधि लेंगे। वे गले से नीचे तक धरती में रहेंगे। ताकि सरकार को गाय माता के सरताप से बजाया जा सके। उसे सद् बुद्धि आए।

ये रहे मौजूद : महादेव गो रक्षा दल से संजय भट्ठ, सतबीर, सुभाष जिंदल, विजय लिलारिया, संदीप राणा, कृष्ण पहलवान, जनक पोपली, बाबा बच्ची गिरी, जगमाल, शालू सैनी, ममता, प्रिया शर्मा, राजेंद्र शर्मा, पप्पू राणा, सतबीर राणा, बाबा भगवान गिरी, परशराम सहित अन्य मौजूद रहे।

गो भक्तों ने कहा कि शनिवार को कोई भी अधिकारी उनके पास मिलने को नहीं पहुंचा। जबकि शुक्रवार तक सभी अधिकारी संत से बातचीत करने पर तुले हुए थे। लेकिन उन्हें आज क्या हो गया। अधिकारियों की उनके पास आने की हिम्मत ही नहीं हो रही है।

संत गोपाल दास ने लिखकर कहा कि सरकार ने उनकी सारी मांगों को मान लिया था। आरके चौधरी ने उन्हें मानी गई मांग पत्र भी दिया था। जिसे प्रदेश के सभी जिलों के जिला उपायुक्तों के पास भेजा जाना था। लेकिन अब किसी भी डीसी के पास मानी गई मांगों का पत्र नहीं भेजा।

गो भक्तों ने बताया कि 1952 की चकबंदी और 36 बिरादरियों की सहमति से वाजिब शर्तो के मुताबिक कुल भूमि का 13 प्रतिशत भाग गोचरान के लिए आरक्षित कर दिया था। जो बाद में माननीय उच्च न्यायालय के अनुसार पांच प्रतिशत कर दिया गया था। भारत वर्ष में गो चरान भूमि की अब अति दयनीय स्थिति बन चुकी है। अब 0.02 प्रतिशत गो चरान की भूमि ही रह गई है।