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खादी ग्रामोद्योग पर खादी की जगह मिल सकती है लीनन

7 वर्ष पहले
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अम्बाला. सावधान, चुनावी माहौल में खादी खरीदना आपको महंगा पड़ सकता है। खादी के स्टोरेज पर कारोबारी असली की जगह खादी के शौकीनों को लीनन थमा रहे हैं जो पावरलूम से बना होता है। खादी हाथ से बने होने के कारण और कपड़ों से महंगा हो जाता है। वहीं पावरलूम से बने कपड़े का मेकिंग कॉस्ट कम होती है। इसके चलते व्यापारी मुनाफा ज्यादा होने के कारण खादी ग्रामोद्योग के स्टोरेज पर ग्राहक को लीनन को खादी बताकर बेच रहे हैं। कई लोगों के साथ यह धोखा हो चुका है। मगर खादी स्टोरेज पर लीनन बेचने वाले कारोबारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। इस तरह की धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार ने ऑडिट व तकनीकी विभाग बनाया हुआ है लेकिन अब तक दोनों विभागों के अफसर हरकत में नहीं आए।

क्या है फर्क
खादी और पावरलूम के कपड़े में वह ही फर्क है, जो एक मिट्टी के बर्तन व स्टील के बर्तन में होता है। खादी का कपड़ा हाथों से ही कता व बुना जाता है। इससे इसकी बुनाई करते समय छोटे-छोटे महीन छिद्र रह जाते हैं जिसके कारण शरीर को आसानी से बाहरी हवा मिल जाती है। खादी गर्मियों में ठंडा व सर्दियों में गर्म रह पाता है। वहीं पावरलूम में छिद्र नहीं छूटते और कपड़ा बाॅडी फ्रैंडली नहीं रहता।
कैसे पहचानें खादी
खादी के कपड़े में बुनाई करते समय धागे टूट जाने के कारण छोटी-छोटी गांठें लग जाती हैं जो इसकी पहचान का सबसे सरल रास्ता है। यदि खादी ग्रामोद्योग के किसी भी स्टोर्स पर यदि कोई इस तरह ग्राहकों से धोखाधड़ी करते हुए मिलता है तो स्टोर्स जिस व्यापारी या संस्था द्वारा चलाया जा रहा है। सबसे पहले विभाग द्वारा दिया गया लाइसेंस निरस्त कर दिया जाता है और सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी भी देना बंद कर दिया जाता है।
चुनाव में बढ़ती बिक्री
चुनावों में खादी की बिक्री आम दिनों की अपेक्षा बढ़ जाती है। क्योंकि खादी का मसलीन कपड़ा नेताओं में पसंद किया जाता है। हरियाणा के 91, अम्बाला में 12 स्टोर हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में हरियाणा के खादी स्टोरेज पर 74 लाख, अम्बाला के खादी स्टोर पर 7.36 लाख की बिक्री हुई थी। इस बार यह बिक्री बढ़ने की आशंका है। क्योंकि इस बार चुनाव अक्टूबर में हैं। अक्टूबर में खादी स्टोर पर गांधी जयंती से 31 जनवरी तक विशेष छूट दी जाती है।
इस तरह की यदि कोई सूचना मिलती है तो सरकार की तरफ से ऑडिट व तकनीकी विभाग बनाया गया है। जो मौके पर जाकर संबंधित संस्था व व्यापारी पर सख्त से सख्त कार्रवाई करता है। लेकिन अभी तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है।
- एसके मिश्रा, सहायक निदेशक खादी और ग्रामोद्योग आयोग, भारत सरकार।