(सिटी के एमडीएसडी कालेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रो. शिप्रा गुप्ता को सम्मानित करते रवनीत गर्ग।)
अम्बाला। महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा हासिल करने के लिए शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है। संविधान में महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने और अत्याचारों का सामना करने के लिए विभिन्न कानूनी प्रावधान किए गए हैं, जिनसे महिलाएं ऐसी स्थितियों का दृढ़ता से मुकाबला कर सकती हैं।
यह विचार पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के विधि विभाग की प्रो. डाॅ. शिप्रा गुप्ता ने राजकीय महाविद्यालय अम्बाला छावनी और एमडीएसडी कन्या महाविद्यालय अम्बाला शहर में आयोजित कानूनी साक्षरता सेमिनारों को संबोधित करते हुए कहे। इन कार्यक्रमों की अध्यक्षता मुख्य न्याय दंडाधिकारी व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव रवनीत गर्ग ने की। डाॅ. शिप्रा गुप्ता ने इन सेमिनारों में घरेलू हिंसा,
विवाह से संबंधित विभिन्न प्रताड़नाओं के साथ-साथ कामकाजी महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, नाबालिग लड़के/लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न सहित महिलाओं और बच्चों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और उनके लिए कानूनी संरक्षण पर चर्चा की।
सीजेएम रवनीत गर्ग ने कहा कि छात्राओं को मेहनत और लगन से शिक्षा हासिल करके आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के प्रयास करने होंगे ताकि वे जीवन में किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भरता कम कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियां प्रतिभा के क्षेत्र में लड़कों से किसी भी स्तर पर कम नही हैं, उन्हें केवल अपनी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़कर कार्य करने की आवश्यकता है।
वहीं एडवोकेट नितेश साहनी ने विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही नि:शुल्क कानूनी सेवाओं और लोक अदालतों के माध्यम से दी जा रही त्वरित न्यायिक सुविधाओं पर चर्चा की। इन कार्यक्रमों के आयोजन में राजकीय महाविद्यालय अम्बाला छावनी और एमडीएसडी कन्या महाविद्यालय अम्बाला शहर के लिगल लिटरेसी क्लबों व एनएसएस यूनिट का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इय दौरान प्रिंसीपल डाॅ. किरण आंगरा ने विधिक सेवा प्राधिकरण का आभार व्यक्त किया और इस तरह के जागरुकता कार्यक्रमों को और अधिक गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में लिगल लिटरेसी की प्रभारी डाॅ. सीमा सिंगल, एनएसएस प्रभारी जीवंती जोशी, निशा दुआ प्राध्यापक मौजूद थे।
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