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  • 5 स्कूलों में गंदगी में खाना बनाना पड़ा रहा कुक को, बच्चों की बिगड़ सकती है सेहत

मिड-डे मील का खाना बनाने के लिए जगह नहीं, गंदगी में तैयार हो रहा भोजन

7 वर्ष पहले
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अम्बाला सिटी। भले ही सरकार द्वारा प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए दोपहर का भोजन देने के लिए मिड-डे मील जैसी योजना शुरू की गई हो, लेकिन इस योजना के तहत सरकार द्वारा मिड-डे मील तैयार करने वाले कुक को सुविधाएं न मिलने के कारण स्कूल के बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है।

दरअसल वर्ष 2003 में प्राइमरी व वर्ष 2007 में सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के लिए मिड-डे मील योजना का शुभारंभ किया था। शिक्षा विभाग व स्कूलों के मुखियों द्वारा योजना के तहत कुक को कुछेक सुविधाएं ही प्रदान की जाती हैं। सभी सुविधाएं न होने की वजह से बच्चों के स्वास्थ्य से विभाग व मुखिया खिलवाड़ कर रहा है। इस योजना के तहत सरकारी ओर से कुक को साफ व स्वच्छ मिड-डे मील तैयार करने के लिए सावधानियां बरतने के आदेश जारी किए हुए हैं, लेकिन अधिकारी व स्कूलों के मुखिया कुक को मिड-डे मील तैयार करने के लिए ही बोलते हैं, लेकिन इनको खाना बनाते समय एप्रेन जैसी सुविधा नहीं दी जाती। इस कारण कुछ गंदगी में ही बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार करते हैं। सरकार की ओर से बच्चों को दाल, चावल के अलावा अन्य खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है, परंतु जिला शिक्षा विभाग की ओर से कुछेक सुविधाएं ही कुक व बच्चों को दी जाती है। जिस कारण कुक के साथ-साथ बच्चों को भी परेशानियां उठानी पड़ती है।
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