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दोहरे मापदंड से भाजपा सांसद नाखुश, दूसरी लिस्ट आते ही मूल कार्यकर्ताओं में रोष

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने शनिवार को 47 नामों की दूसरी और अंतिम लिस्ट जारी कर दी। केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक-एक उम्मीदवार के नाम को बारीकी से परखा। बैठक में प्रधानमंत्री के साथ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, गृहमंत्री राजनाथ सिंह व अन्य नेता शामिल हुए। पार्टी महासचिव व केंद्रीय चुनाव समिति के सचिव जगत प्रकाश नड्डा ने सूची जारी की।
भाजपा ने प्रदेश की 90 में से 15 सीटों पर महिलाओं को भागीदारी दी है। जबकि इनेलो ने अब तक घोषित 81 में से 13 महिलाओं को मौका दिया है। भाजपा ने शनिवार को जारी 47 प्रत्याशियों की सूची में 8 और पहली 43 उम्मीदवारों की सूची में 7 महिलाओं को मौका दिया था।

इंद्रजीत की बेटी को टिकट नहीं

इस सूची में बेशक 8 महिलाओं को टिकट मिला है। लेकिन, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह अपनी बेटी आरती राव को टिकट नहीं दिला सके। राव अपनी बेटी के लिए रेवाड़ी से टिकट मांग रहे थे।

सुषमा की बहन को टिकट

सफीदों से सुषमा स्वराज की बहन वंदना शर्मा को टिकट दिया है। पार्टी का कहना है कि वंदना लंबे समय से भाजपा की सक्रिय कार्यकर्ता है, इसलिए उन्हें टिकट दिया है।
कुलदीप के सामने कर्ण अभय के सामने पवन
पुराने सहयोगी व हरियाणा जनहित कांग्रेस के मुखिया कुलदीप बिश्नोई के सामने भाजपा ने आदमपुर से कर्ण सिंह रनौलिया को मैदान में उतारा है। वहीं, ऐलनाबाद में अभय चौटाला को भाजपा के पवन बेनीवाल टक्कर देंगे। बेनीवाल पिछले माह ही इनेलो छोड़कर भाजपा में शािमल हुए हैं और अभय के खासमखास रहे हैं।
हाथ मलते ही रह गए सांसद

भाजपा के सांसद अपने रिश्तेदारों की टिकट के लिए हाथ ही मलते रह गए हैं। हालांकि पार्टी ने इन्हें पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे अपने बेटे-बेटी और रिश्तेदारों के टिकट का प्रयास न करें। इनमें गुड़गांव सांसद राव इंद्रजीत अपनी बेटी आरती राव, फरीदाबाद सांसद कृष्णपाल गुर्जर अपने बेटे देवेंद्र, भिवानी-महेंद्रगढ़ सांसद धर्मबीर अपने भाई राजबीर सिंह लाला, अम्बाला सांसद रतनलाल कटारिया अपनी पत्नी बंतो कटारिया, सोनीपत सांसद रमेश कौशिक अपने भाई देवेंद्र कौशिक और कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी अपने समधी बलवीर सैनी के लिए टिकट मांग रहे थे। उधर, सूची जारी होते ही पार्टी में विरोध के सुर भी उठने लगे।
टिकट वितरण में भाजपा हाईकमान द्वारा दोहरे मापदंड अपनाए जाने से पार्टी सांसद खुश नहीं है। हालांकि वे खुले तौर पर विरोध करने से अभी बच रहे हैं, लेकिन इनका कहना है कि जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बहन वंदना शर्मा को सफीदों और प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा के समधी मूलचंद शर्मा को बल्लभगढ़ से टिकट दिया जा सकता है तो बाकी सांसदों के परिजन और रिश्तेदारों को टिकट क्यों नहीं?
इनका कहना है कि तोशाम में सांसद धर्मबीर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बंसी लाल परिवार से बरसों से लोहा ले रहे हैं, फिर भी उनके भाई राजबीर लाला को टिकट नहीं दिया गया। इसी तरह रेवाड़ी में अगर गुड़गांव के सांसद राव इंद्रजीत की बेटी आरती राव और अन्य सांसदों के परिजनों या रिश्तेदारों को टिकट दिया जाता तो भाजपा को चुनाव में ज्यादा फायदा होता।
...और बढ़ेगा घमासान
नाराज नेताओं ने आज बुलाई मीटिंग
पहली सूची के बाद शुरू हुए बवाल से निपटने की कोशिशों के बीच दूसरी सूची आते ही कई जगह बगावत के सुर उभरे। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि दूसरी लिस्ट में टिकट पाने वालों में बमुश्किल 5 से 7 ही मूल कार्यकर्ता हैं। अधिकांश टिकट दल-बदलुओं को दिए गए। रोहतक, कैथल और कालका सीट पर नाराज नेताओं ने रविवार को समर्थकों की बैठक बुलाई है।
कैथल: सुरेंद्र प्रत्याशी बने, गर्ग विरोध में
कैथल सीट से राव सुरेंंद्र सिंह के नाम का ऐलान होते ही सुरेश गर्ग नौच ने अनाज मंडी में व्यापारियों की बैठक करके नाराजगी जताई। उन्होंने आगे की रणनीित के लिए रविवार सुबह 10 बजे फिर बैठक बुलाई है। चर्चा है कि वे आजाद चुनाव लड़ने की घोषणा कर सकते हैं। नौच ने कहा कि बैठक में बिरादरी जो फैसला करेगी, उन्हें मंजूर होगा।
हार की हैट्रिक लगा चुके मनीष ग्रोवर राेहतक से प्रत्याशी
रोहतक सीट पर भी हार की हैट्रिक लगा चुके मनीष ग्राेवर को टिकट देने का विरोध शुरू हो गया है। हाल में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए मनमोहन गोयल ने रविवार को अपने समर्थकों की मीटिंग बुला ली है। अगर गोयल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया तो इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होगा। उधर, कालका में लतिका शर्मा को बाहरी प्रत्याशी बताकर उनका विरोध हो रहा है।
यहां के मंडल अध्यक्ष संजीव कौशल, पूर्व प्रत्याशी वीरेंद्र राणा और टिकट के दावेदार वीरेंद्र भाऊ का कहना है कि टिकटों का विरोध तो नहीं है, लेकिन कार्यकर्ताओं में मायूसी है। ऐसी चर्चा है कि विरोध स्वरूप रविवार या सोमवार को कई लोग पार्टी छोड़ सकते हैं।
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