अम्बाला. अम्बाला की राजनीति में बोह और बब्याल का महत्व किसी से छिपा नहीं है। नग्गल हलके में हाेने के दौरान भी इन गांवों का महत्व राजनीति के धुरंधर अच्छी तरह से जानते थे। अब यह दोनों गांव कैंट विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। पहले भी राजनीतिक पार्टियों के सबसे ज्यादा जनसंपर्क अभियान यहीं हुआ करते थे। यहां के वोटरों को साधने के लिए पार्टियां हर जुगत भिड़ा रही हैं। पहले भी यहां स्टार प्रचारकों और राजनीति के दिग्गजों का जमावड़ा देखा जाता था जो इन चुनावों में भी देखा जा सकता है।
जागरूक वोटरों की बड़ी संख्या
बाेह और बब्याल को 36 बिरादरियां के गांव माना जाता है। हर जाति का वाेटर यहां बढ़-चढ़कर मतदान में अपना योगदान देता है। बब्याल के साथ गांव दलीपगढ़ अौर बोह के साथ लगते रामगढ़ माजरा के वोटरों का भी पूरा योगदान इन गांवों की राजनीति पर पड़ता है। बोह बब्याल में जिस पार्टी के पक्ष में हवा बहती है। उसी दिशा में दलीपगढ़ और रामगढ़ माजरा के ज्यादातर वोट हो लेते हैं। इसलिए पार्टियां यहां ज्यादा से ज्यादा चुनाव प्रचार अभियान चलाती हैं। इन इलाकों के वोटरों को मोहने के लिए पार्टियों द्वारा अलग से रणनीति भी बनाई जाती है।
32 हजार वोटों पर नजर
फिलहाल ये गांव नगर निगम में शामिल हो गए हैं। बोह, रामगढ़ माजरा और दलीपगढ़ का काफी हिस्सा वार्ड नंबर 12 के अधीन आ गया है। वहीं वार्ड नंबर 13 में शामिल किए गांव बब्याल के साथ कई काॅलोनियों को भी जोड़ा गया है। दलीपगढ़ का एक टुकड़ा वार्ड नंबर 13 में भी आता है। निगम चुनावों में किस्मत आजमाने वाले ब्लाॅक समिति के पूर्व चेयरमैन नीटू सचदेवा ने बताया कि बब्याल और उसके साथ लगती कालोनियों में लगभग 16 हजार वोटर हैं। वहीं बोह और उसके साथ लगती कालोनियों में लगभग 15 हजार के करीब वोटर मौजूद हैं। इसके अलावा रामगढ़ माजरा के पांच सौ वोट और दलीपगढ़ के 18 सौ वोट भी किसी का चुनावी समीकरण तय करने में काफी योगदान देते हैं।