अम्बाला। आस्ट्रिया में 2017 में होने वाले विंटर ओलंपिक गेम्स के लिए कोच अपने खिलाड़ियों को भेजने के लिए हर जुगत भिड़ा रहे हैं। मानसिक रूप से अशक्त बच्चों को खेलों में पारंगत करने के लिए दर्जनों कोच दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। इन महिला और पुरुष काेचों का दो दिवसीय ट्रेनिंग कैंप सेना क्षेत्र के आशा स्पेशल स्कूल में चल रहा है।
नेशनल व इंटरनेशनल खिलाड़ी इन कोचों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस कार्यक्रम की जानकारी देने के लिए खिलाड़ी वीरेंद्र, सुखबीर समेत आशा स्कूल की प्रिंसिपल लक्ष्मी रैना और कैंटोनमेंट के वात्सल्य जेक्शन सेंटर से जुड़ी सुनैना राणा ने पत्रकार वार्ता में दी।
वीरेंद्र कुमार ने बताया कि दो दिवसीय ट्रेनिंग में 30 कोच भाग ले रहे हैं जो पूरे हरियाणा से हैं। सुखबीर ने बताया कि विदेशों में बर्फ पर हाॅकी आैर बाल गेम खेली जाती है इसलिए उन्हीं मिलती-जुलती परिस्थितियों में उन्हें सीमेंट के फ्लोर पर सिखाया जा रहा है।
सच्चे होते हैं ये बच्चे: लक्ष्मी रैना ने बताया कि यह बच्चे झूठ और फ्रेब नहीं जानते। यह कई मामलों में आम बच्चों से अव्वल होते हैं। यदि इन्हें प्रोत्साहित किया जाए तो यह बच्चे हर काम करने में सक्षम होते हैं। रविवार को होने वाले खेल प्रतियोगिताओं में कर्नल आशीष मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत करेंगे।
जिस स्कूल में पढ़ा, उसी में मिली नौकरी
आशा स्कूल की प्रिंसिपल लक्ष्मी रैना ने बताया कि उनके स्कूल में पढ़ने वाला योगेश इसी स्कूल में हेल्पर के तौर पर काम कर रहा है। उसकी मां मधु भी पति सुनील के देहांत के बाद स्कूल में ही पढ़ा रही है। योगेश अपनी मां पर बोझ नहीं बनना चाहता था इसलिए उसने काम करने की ठानी। योगेश का भाई आईआईटी कानपुर में पढ़ाई कर रहा है और बहन बैंगलोर में साॅफ्टवेयर इंजीनियर है।
(फोटो- बेटे योगेश को दुलार करती मां।)