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अब लोगों ने कसी कमर, बोले- "वोट मांगने आएं तो सही, सवाल पूछे जाएंगे"

8 वर्ष पहले
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पार्षद बनने के लिए प्रत्याशी भागदौड़ में लगे हैं। बायोडाटा तैयार हो रहे हैं। बनाना नहीं आता तो अनुभवी नेताओं से राय ली जा रही है। मतदाता भी सूची तैयार करने में लगे हैं। यह सूची है समस्याओं की। भास्कर ने जागरूक महिलाओं से चर्चा की और जानना चाहा कि उनकी क्या तैयारी है।

आश्वासन नहीं चलेंगे

शिक्षाविद शशी धमीजा का कहना है कि इस बार आश्वासन नहीं चलेंगे। जो वोट मांगने आएगा उससे साफ कहा जाएगा कि आप वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए क्या करेंगे? इस अम्बाला ने सूरजभान, सैलजा और सुषमा स्वराज जैसे कई बड़े नेता दिए, बदले में अम्बाला को क्या मिला। सबसे गंदे शहर का तमगा। भिनभिनाते हुए मच्छरों का प्रकोप, सड़ांध मारती नालियां और गड्ढेदार सड़कें।

तैयारी के साथ आएं भावी पार्षद

बैंककर्मी अर्चना सोढ़ी का कहना है कि भावी पार्षद पूरी तैयारी के साथ आएं। लोग जागरुक हो गए हैं। वोट देंगे, जिताएंगे भी लेकिन पार्षद का तमगा लेकर घर नहीं बैठने देंगे। उनसे कहा जाएगा कि वह नाले को लेकर प्रोजेक्ट तैयार करें। यह नाला अम्बाला की खूबसूरती में ग्रहण हैं और बीमारी का कारण है। नकद पैसे लेकर घरों कचरा ले जाने वाले भी यह कचरा नाले में डाल रहे हैं।

अधिकारी न काम करते, न करने देते

समाजसेविका पूनम रावल का कहना है कि नगर निगम भ्रष्टाचार का केंद्र है। अधिकारी काम नहीं करते और करने भी नहीं देते। वाटिका के लिए एक दिन सिर्फ एक दिन के लिए रजिस्ट्री का काम होता है। उसके बाद रजिस्ट्री का काम बंद हो जाता है। जिन्हें पार्षद बनना है कि वह अभी से तैयारी कर ले। हमने अपना एजेंडा तैयार कर लिया है वह अपना एजेंडा तैयार कर लें। इस बार मीठी गोली नहीं चलेगी।

चुनाव सिर्फ नौटंकी

समाजसेविका विजय गुप्ता नगर निगम की व्यवस्था से बेहद नाखुश हैं। उनका कहना है कि यह चुनाव सिर्फ नौटंकी है। कोई काम करना नहीं चाहता। जनता हमेशा बेवकूफ बन जाती है। चुनाव लड़नेवाले बाद में नजर नहीं आते। यदि इस शहर को संवारना ही है तो चुनाव लड़ने वाले शपथ लें कि वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करेंगे। जनता को भी समझना होगा। जो वार्ड में काम करे उसे चुनना होगा।

नगर निगम का भ्रष्टाचार उजागर होना चाहिए

संजू मित्तल और इंदू खन्ना का कहना है कि बुढ़ापा पेंशन का सच सामने आना चाहिए। जो समर्थ हैं वह गरीबों का हक छीन रहे हैं। पात्र लोग भटकते रहते हैं उनकी सुनवाई नहीं होती। सड़कें बनती हैं और कुछ दिन बाद ही उनका दम निकल जाता है। नगर निगम का भ्रष्टाचार उजागर होना चाहिए। इस चुनाव को कोई साधारण तरीके से न लें। चुनाव लड़ने वालों को पसीना आ जाएगा। लोगों को अपने वोट की कीमत पता है। ढाई साल लोगों ने बहुत परेशानी झेली है। फ्लैक्स, जागरण, बोर्ड, नारे, आश्वासन व होर्डिग्स से चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

लोगों को जागरूक करेंगे

शिक्षिका अदिति वालिया ने कहा कि किस पर भरोसा करें। गोविंद नगर में एक कुत्ते ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है। कइयों से कहा लेकिन किसी ने नहीं सुना। जो सड़क बनाई गई है, उसे देखिए। कितनी बेतरतीब है। लोग परेशान हैं। जब वोट मांगने वाले आएंगे, तब उनसे सवाल किया जाएगा कि इतने दिन कहां थे। हम लोगों को जागरूक करेंगे।