साहा। ग्रामीणों के इलाज के लिए सरकार ने समलेहड़ी पीएचसी को लाखों रुपया खर्च कर बनवाया था मगर आज इस पीएचसी को खुद इलाज की दरकार है। समलेहड़ी पीएचसी के अधीन 30 गांव व चार सब सेंटर आते हैं। हजारों लोगों को इलाज की बढ़िया व ससती सुविधा मुहैया कराने के मकसद से बनवाई गई पीएचसी सरकार की उपेक्षा का शिकार है। पीएचसी के अपने भवन को छोड़ कर बाकी सब जगह सफाई की दरकार है।
इसकी चारदीवारी के अंदर कई एकड़ जगह है जिसमें से ज्यादातर जगह खाली पड़ी है जिसमें हर जगह बड़ी-बड़ी झाड़ियां व खरपतवार उगे हुए हैं। देखने से लगता है कि कई साल से इसकी सफाई ही नहीं करवाई गई। पीएचसी के प्रांगण में डाॅक्टरों व स्टाफ के लिए बने रिहायशी कमरे खंडहर बन चुके हैं। इनके सभी दरवाजे व खिड़कियां गायब हो चुके हैं। रहने की जगह न होने के चलते रात के समय पीएचसी में कोई डाॅक्टर नहीं मिलता। ग्रामीण पिछले कई साल से यह मांग कर रहे हैं कि पीएचसी में डाॅक्टरों के रहने के लिए नए रिहायशी मकान बनाए जाएं।
समलेहड़ी के निवासी सुभाष सिंह ने कहा कि पीएचसी में जाकर ऐसा लगता है कि यह किसी जंगल के बीच बनी है। उन्होंने कहा कि पीएचसी के भवन के आसपास भी बड़ी-बड़ी झाडि़यां उगी हैं। इसके प्रांगण में अवारा पशु घूमते रहते हैं। समलेहड़ी के ही भूषण कुमार ने कहा कि रात के समय पीएचसी में स्टाफ न होने के कारण मरीज को अम्बाला छावनी लेकर जाना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रात को इमरजेंसी में यहां यदि खून आदि की जांच करवानी हो तो लैब टेक्नीशियन मौजूद नहीं है।
संभालखा निवासी अरविंद ने आरोप लगाया कि पीएचसी के लिए लाखों रूपये का बजट आता है मगर न तो यहां सुविधांएं मिलती हैं, न जरूरत पड़ने पर स्टाफ। उन्होंने कहा कि रविवार या दूसरे सरकारी अवकाश पर पीएचसी में एक-दो कम॔चारी ही मिलते हैं। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रात को पीएचसी के प्रांगण में अंधेरा छाया रहता है जिस कारण रात के समय यहां आने में भी डर लगता है। ग्रामीणों ने मांग की है शीघ्र ही पीएचसी की सफाई करवाई जाए और यहां स्टाफ के लिए नए रिहायशी मकान बनवाए जाएं।
इस बारे में जब पीएचसी के हेड डाॅक्टर पंकज सैणी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पीएचसी प्रांगण की सफाई नियमित तौर पर करवाई जाती है। बरसात में झाडि़यां उग आयी हैं इन्हें भी कटवा दिया जाएगा।
(फोटो- समलेहड़ी पीएचसी के डॉक्टरों के रिहायशी भवन, जो खंडहर बन चुके हैं।)