अम्बाला. न्यूट्रीशियन रिहेबलिटेशन सेंटर (एनआरसी) का बजट दो माह से जिला स्वास्थ्य विभाग के खाते में पड़ा है। बाकायदा स्टाफ की भर्ती भी की जा चुकी है लेकिन सिविल अस्पताल के प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर (पीएमओ) को पता ही नहीं कि बजट कहां अटका है। भास्कर ने जब इस मामले में पूछताछ की तो सामने आया कि पीएमओ कार्यालय ने एनआरएचएम के इस बजट को हासिल करने के लिए प्रॉसेस ही ढंग से फॉलो नहीं किया गया।
यही वजह रही कि कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य सुधारने के लिए शुरू किया जाने वाला यह प्रोजेक्ट समय पर शुरू नहीं हो पाया। सीएमओ कार्यालय के अनुसार एनआरसी के प्रोजेक्ट की ड्राइंग को कार्यकारी पीएमओ पूनम जैन ने अस्पताल की लोकल कमेटी एसकेएस से ही अप्रूव करा लिया। हालांकि, इस प्रोजेक्ट के लिए अपू्रवल जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति के माध्यम से डीसी से ली जानी थी। ऐसा न किए जाने से प्रोजेक्ट समय पर शुरू नहीं हो पाया। अब प्रोसेस फॉलो किया जाएगा।
ऐसे काम करेगा एनआरसी
एनआरसी को विभाग ने एक नए प्रयोग के तौर पर शुरू करना था। इस वार्ड में दाखिल बच्चों को पोषाहार तो दिया ही जाएगा, वार्ड की दीवारों पर मिक्की माउस, छोटा भीम, टॉम एंड जैरी, माईटी राजू जैसे कार्टून बनाए जाएंगे। नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) अम्बाला, पंचकूला व करनाल में इसे पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्ल गगनजोत सिंह का कहना है कि बच्चों के स्वस्थ होने के बाद भी नियमित चेक किया जाएगा।