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निगम के डस्टबिन पर प्राइवेट स्कूल और अस्पतालों का कब्जा

6 वर्ष पहले
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अम्बाला। इसे नगर निगम की शिथिलता कहें या निजी संस्थानों की दादागिरी। सार्वजनिक स्थानों पर रखे गए निगम के डस्टबिन को अपनी जागीर समझ लिया और उन्हें वहां से हटाकर अपने प्रयोग में लाने लगे। भास्कर को इस मामले की जब भनक लगी तो ग्राउंड रियलिटी का पता चला। कई सार्वजनिक स्थानों पर रखे गए डस्टबिन या तो प्राइवेट स्कूलों के अंदर चले गए हैं या फिर प्राइवेट अस्पतालों में प्रयोग किए जा रहे हैं। हैरानी तो इस बात की है कि निगम की गाड़ियां स्वयं स्कूल व अस्पताल के अंदर जाकर डस्टबिन से कूड़ा एकत्रित कर रहे हैं।

निगम के पास सिटी व कैंट में कूड़ा डालने के लिए अभी तक पूरे डस्टबिन नहीं हैं। पार्षद भी बार-बार डस्टबिन देने की मांग करते रहे हैं। अन्य स्थानों पर रखे गए डस्टबिन भर जाते हैं तो उन्हें उठाने के लिए निगम की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंचती, लेकिन निजी संस्थानों के अंदर रखे गए डस्टबिन भरते ही गाड़ी लेकर उठा लिया जाता है।

250 डस्टबिन हैं सिटी व कैंट में: नगर निगम के पास सिटी व कैंट में 250 डस्टबिन हैं। जब यह डस्टबिन भर जाते हैं छह गाड़ियां इन्हें उठाने का काम करती हैं। कूड़ा-कर्कट को उठाकर शहर के बाहर ले जाती हैं। एक डस्टबिन की कीमत 25 हजार है।
यहां रखे गए डस्टबिन, पूछने पर जवाब भी मिले गजब
केस 1 सिटी के चंडीगढ़ रोड स्थित हीलिंग टच अस्पताल में पीछे नगर निगम के एक नहीं दो डस्टबिन रखे गए हैं। जिन पर बाकायदा नगर निगम अम्बाला लिखा हुआ है।
केस 2 वहीं पीकेआर पब्लिक स्कूल में भी एक नहीं दो डस्टबिन रखे गए हैं। हैरानी तो इस बात की है कि इन पर से नगर निगम पेंट कर गायब कर दिया गया है।