अम्बाला। अम्बाला रेलवे के जीडीसीई परीक्षा पैटर्न में अहम बदलाव करने से रेलवे में काम कर रहे ग्रुप डी के शिक्षित कर्मचारी भी टीटीई और गॉर्ड बन सकेंगे। पैटर्न में बदलाव से ग्रुप डी के कर्मचारी अब योग्यता के हिसाब से अलग-अलग पदों की परीक्षा दे पाएंगे। टीटीई, गॉर्ड सहित अन्य समकक्ष पदों की योग्यता रखते हैं तो वह भी इन परीक्षाओं में भाग ले सकेंगे। चयन के बाद उन्हें इन पदों पर ज्वाइनिंग दे दी जाएगी।
इसलिए करना पड़ा जीडीसीई पैटर्न में बदलाव: बेरोजगारी के चलते उच्च शिक्षा की योग्यता रखने के बाद भी युवा ग्रुप डी की परीक्षाओं में भाग्य आजमाते हैं। लेकिन चयन के बाद भी उन्हें प्रमोशन नहीं मिलता है। बोर्ड के फैसले से ऐसे युवाओं को राहत मिलेगी। पीजी या अन्य तकनीकी योग्यता रखने वाले युवा/ग्रुप डी के कर्मचारी उपर के पदों के लिए सीधी परीक्षा दे सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने संशोधन से जुड़े आदेश सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधकों को भेज दिया है।
ग्रुप डी के रैंकर कोटे के कर्मी बन सकते हैं टीसी और पीसी
उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन अम्बाला मंडल के सचिव विजय चोपड़ा का कहना है कि रेलवे में ग्रुप डी के रैंकर कोट में पहले भी पदोन्नति की परीक्षाएं होती रही है। रैंकर कोटे में ग्रुप डी कर्मचारियों का 33.1/3 प्रतिशत कोटा होता है जो कॉमर्शियल और आपरेटिंग में काम कर रहे होते हैं। एक परीक्षा पास करने बाद ग्रुप डी के रैंकर कोटे के कर्मचारी टिकट कलक्टर, बुकिंग और पार्सल क्लर्क बन सकते हैं। इसी प्रकार रेलवे के अन्य विभागों में रैंकर कोटे के तहत क्लर्क, तकनीशियन व अन्य पदों पर पदोन्नति पा सकते हैं।
ग्रुप डी 37 कर्मियों ने गॉर्ड की परीक्षा पास की: सितंबर में ग्रुप डी के रैंकर कोटे की आयोजित परीक्षा में दो क्लर्क पास हुए हैं वहीं पांच दिसंबर 2013 को आयोजित ग्रुप डी की रैंकर परीक्षा में 37 कर्मचारियों ने गॉर्ड की परीक्षा पास की है।
ग्रुप डी में तीन साल नौकरी के बाद ही भाग ले सकेंगे परीक्षा में: रेलवे ग्रुप डी के जो कर्मचारी इस परीक्षा में भाग लेना चाहते हैं, उन्हें इस वर्ग में कम से कम 3 साल तक नौकरी करना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही वह इस परीक्षा में भाग ले सकेंगे।
सीपीओ करवाएंगे परीक्षा
जनरल डिपार्टमेंट कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन की परीक्षा जोनल स्तर पर चीफ पर्सन ऑफिसर कराएंगे। इसमें जोनल स्तर पर रेलवे भर्ती सेल आरआरसी भी मदद करेगा।
रेलवे के मान्यता प्राप्त संगठनों की मांग पर किया संशोधन
रेलवे में मान्यता प्राप्त संगठन के रूप में रजिस्टर्ड ऑल इंडिया मेंस यूनियन फेडरेशन और एनएफआईआर ने ग्रुप डी के शिक्षित कर्मचारियों को उनकी योग्यतानुसार अन्य पदों की परीक्षा देने की मांग उठाई थी। इन दोनों संगठनों की मांग पर रेलवे बोर्ड ने जीडीसीई के पैटर्न में बदलाव किया है।
भास्कर नॉलेज
पूरे देश में इंडियन रेलवे में कुल करीब 13.5 लाख कर्मचारी काम कर रहें हैं। इसमें ग्रुप डी के करीब 7 लाख कर्मचारी हैं। अम्बाला में 6000 हजार कर्मचारी ग्रुप डी के हैं जिन्हें जीडीसीई पैटर्न बदलने से लाभ मिलने की संभावना है।
'जीडीसीई पैटर्न में बदलाव से अम्बाला में ग्रुप डी के 6000 कर्मियों को लाभ मिलने की संभावना है। इससे ग्रुप डी के कर्मियों के प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है।' -विनीत जैन, सीनियर डीपीओ अम्बाला डिवीजन