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मारीच ने ही मृग बनकर पंचवटी में मां सीता का अपहरण कराया था

7 वर्ष पहले
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अम्बाला. दलीपगढ़ में मंगलवार को आयोजित रामलीला में दर्शकों ने ताड़का वध का प्रसंग का मंचन देखा। ऋषि विश्वामित्र अयोध्या नरेश महाराज दशरथ सुपुत्र राम और लक्ष्मण को मांग कर लाए ताकि ऋषि-मुनियों के यज्ञ में राक्षसों द्वारा किया जा रहा विघ्न बंद हो। भगवान राम-लक्ष्मण ने सिद्धाश्रम में पहुंचकर बाण मारकर रावण की नानी और राक्षस मारीच की मां ताड़का का वध कर दिया। ताड़का के साथ राक्षस सुबाहु का भी वध किया गया।

राम-लक्ष्मण ने मारीच को भी बाण मारकर मारकर सौ योजन दूर समुद्र के पार फेंक दिया। ताड़का का किरदार कलाकार गणेश ने निभाया। ताड़का वध के मंचन को निर्देशक सुनील ने निर्देशित किया।

सुनील ने बताया कि सिद्धाश्रम में ही ऋषि विश्वामित्र अनेक ऋषियों के साथ रहते थे। यह स्थान वर्तमान में बक्सर बिहार में पड़ता है। उन्होंने बताया कि मारीच को राम-लक्ष्मण ने मारा तो गोस्वामी तुलसीदास रचित मानस के अनुसार सतयोजन गा सागर पारा। अर्थात सौ योजन समुद्र पार जाकर मारीच गिर पड़ा। जहां मारीच गिरा, उस स्थान को ही वर्तमान में मॉरीशस के नाम से जाना जाता है। भगवान को अभी और लीला करनी थी इसलिए उन्होंने मारीच का पूर्ण वध नहीं किया। बाद में इसी मारीच ने मृग बनकर पंचवटी में मां सीता का अपहरण कराया।
पंचवटी वर्तमान में नासिक में स्थित है। ताड़का वध के पश्चात रामायण व रामचरित मानस की आरती उतारी गई। प्रभु श्रीराम लक्ष्मण बने कलाकारों का पूजन किया गया व प्रसाद वितरित किया गया।
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