अम्बाला. टिकट बंटवारे को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष, दलबदल, भितरघात और नाराज नेताओं के निर्दलीय मैदान में उतरने से कई उम्मीदवारों की सियासी नैया भंवर में फंसी।
अम्बाला, यमुनानगर, कैथल अौर कुरुक्षेत्र में सभी पार्टियां चुनावी चौसर पर उतर आई हैं। अम्बाला शहर में कांग्रेस से नाता तोड़कर जन चेतना पार्टी बनाने वाले विनाेद शर्मा को अपने साढ़े नौ साल का हिसाब-किताब देना पड़ रहा है। जसबीर मल्लौर यहां से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन अंगूर खट्टे निकले। टिकट मिली असीम गोयल को। मल्लौर ने तो मोर्चा खोला जरूर लेकिन मान-मनौव्वल के बाद लौट आए। इससे भाजपा प्रत्याशी के चेहरे पर रौनक आ गई।
कांग्रेस के युवा प्रत्याशी हिम्मत सिंह पहले ही खम ठोक चुके थे। टिकट तय होने पर उनके खेमे में युवाओं का जोश है। अकाली दल ने बलविंदर सिंह पूनिया को प्रत्याशी घोषित कर शहर की राजनीति में एक नया माहौल पैदा कर दिया है। अम्बाला छावनी से इनेलो ने सूरज प्रकाश जिंदल (बब्याल) को उतारकर बनिया कार्ड खेला है। भाजपा के निवर्तमान विधायक अनिल विज को विकास परिषद के अपने पुराने साथियों को मनाने में जोर लगाना पड़ रहा है। फिलहाल वे मोदी लहर के सहारे हैं। कांग्रेस के निर्मल सिंह के लिए उनकी बेटी चित्रा खेवनहार बनी हैं। यहां त्रिकोणीय मुकाबला रहेगा। ऐसे ही नारायणगढ़ में इनेलो से टिकट न मिलने से नाराज रामसिंह कोड़वा बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी हाथी की सवारी से इनेलो के जगमाल सिंह रौलों के चश्मे का नंबर जरूर बढ़ गया है। भाजपा से नायब सैनी भी पूरी ताकत झाेंक रहे हैं और कांग्रेस रामकिशन गुर्जर विकास के नाम पर वोटर्स को रिझाने में जुटे हैं।
कुरुक्षेत्र का रण भी दिलचस्प होगा। यहां थानेसर से इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा प्रत्याशी हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा से टिकट पाने वाले सुभाष सुधा भी पंजाबी हैं। देखना है-पंजाबी वोटर्स को दोनों में से कौन रिझा पाता है और कांग्रेस क्या चाल चलती है? पिहोवा से इनेलो के जसविंदर सिंह संधू मैदान में हैं। यहां कांग्रेस छोड़कर भाजपा से टिकट पाने वाले जयभगवान शर्मा डीडी पहले इनेलो में भी रह चुके हैं। यहां भी मुकाबला टक्कर का है। लाडवा में इनेलो ने शेर सिंह बड़शामी की धर्मपत्नी बचन कौर को टिकट दी है। जबकि कांग्रेस ने कैलाशो सैनी को दो दिन पहले ही टिकट दिया है। यहां भाजपा से डॉ. पवन सैनी और भाजपा से नाखुश पार्टी को अलविदा कर चुके जतिंदर काका के निर्दलीय खड़ा होने से माहौल गर्माया हुआ है। यहां सबसे बड़ा मुद्दा विकास का है और सभी एकसुर में विकास का दावा कर रहे हैं। ऐसे ही शाहाबाद में इनेलो से रामकरण काला, भाजपा से किशन बेदी और कांग्रेस के प्रत्याशी अनिल धंतोड़ी में टक्कर होगी।
मुलाना सीट (आरक्षित)
बेटे लड़ रहे चुनाव, साख दांव पर दो पूर्व मंत्रियों की
मुलाना सुरक्षित सीट पर भी त्रिकाेणीय मुकाबला है। यहां दो पूर्व मंत्रियों के बेटों की साख दांव पर है। पूर्व मंत्री स्व. रिसाल सिंह के बेटे और इनेलो के विधायक राजबीर बराड़ा और पूर्व मंत्री फूलचंद मुलाना के बेटे वरुण मुलाना और भाजपा की संतोष सारवान में कड़ा मुकाबला है। संतोष भितराघात झेल रही हैं। यहां से चुनाव लड़ चुके मांगेराम पंजैल विरोध कर चुके हैं। वहीं यमुनानगर में इनेलो के प्रत्याशी व विधायक दिलबाग सिंह को भाजपा के प्रत्याशी घनश्याम दास अरोड़ा से सीधी टक्कर मिल रही है। कांग्रेस ने कृष्णा पंडित को टिकट देकर मुकाबला त्रिकोणीय कर दिया है।