अम्बाला। हजारों हाथ भगवान जगन्नाथ के जयकारों में उठे। मौका था भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व महाराज बलदेव के रथ यात्रा का। बतौर मुख्यातिथि उपस्थित मानसी व एडवोकेट मानसिंह काकरान ने भगवान जगन्नाथ के रथ के आगे झाडूृ बुहार कर रथ यात्रा का शुभारंभ किया। इससे पूर्व भगवान जगन्नाथ व उनके रथ का आभूषणों और पुष्पों से शृंगार किया गया।
धूप-दीप, पुष्प और वैदिक मंत्रों से प्रभु जगन्नाथ की विधिवत पूजा-अर्चना, आरती की गई। नारियल फोड़ कर रथ यात्रा का शुभारंभ किया गया। सबसे आगे भजनों को गुंजायमान करता लाउड स्पीकर दल, उसके पीछे हरे-कृष्ण, हरे-हरे की संकीर्तन करती कीर्तन मंडली। उसके पीछे ढोल-मंजीरा बजाते महिलाओं व पुरुष श्रद्धालुओं का उन्मत्त समूह और उसके पीछे भगवान के रथ का रस्सा खींचते श्रद्धालुओं की कतारें। 1200 भक्तों का रेला देश की सांस्कृितक विरासत और परंपरा को साझा करता अम्बाला के मुख्य बाजारों से निकला। जगह-जगह, चौक-चौराहों पर भक्तों ने दौड़कर रथ के आगे जमीन पर माथा नवा प्रभु की चरण रज ली।
विदेशी धरती के लोग भी इस भक्ति के साक्षी बने। चार वर्षों से भगवान जगन्नाथ रथयात्रा में शामिल हो रही अमेरिका की अनीता, 10 साल से भाग ले रहे ब्राजील के गोकुल चंद दास और 15 साल से रथयात्रा में भाग ले रही नीदरलैंड की सावित्री दीदी ने बताया कि उन्हें भगवान जगन्नाथ की आस्था और भारत की परंपरा भारतभूमि पर खींच लाया है।
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