अम्बाला. सैलजा ने दूसरी बार अम्बाला के लोगों को चौकाया है। पहली बार जब वह यहां से सांसद का चुनाव लड़ने आईं, तब लोग चौंक पड़े थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था। सैलजा के पास केंद्रीय मंत्री का पद था। लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि लोकसभा चुनाव में एक बार फिर वह जनता के बीच आएंगी। विपक्ष भी यही सोचता था कि मुकाबला सैलजा से ही होगा। यही कारण था कि विपक्ष फूंक-फूंक कर कदम रख रहा था। उसे पता था कि लोकसभा चुनाव में मुकाबला केंद्रीय मंत्री से करना है। सैलजा ने चौंका दिया। यहां तक कि मीडिया को भी खबर नहीं लगने दी कि अंदर ही अंदर क्या पक रहा है।
अब लोकसभा में कांग्रेस की ओर से कौन उतरेगा, यह बाद की बात है। लेकिन सैलजा जनता के बीच जाने से बच गई हैं। चौंकाने वाली इस खबर और घटना ने राजनीति के गलियारों में भी चर्चाओं का दौर चलाया है। जो सैलजा के समर्थक थे, वे दुखी थे लेकिन कुछ बोल नहीं पा रहे थे। लोगों ने जबरदस्त प्रतिक्रिया व्यक्त की।
भाजपा नेता नायब सैनी, पवित्र सिंह बाजवा, संदीप सचदेवा, पार्षद हरीश शर्मा, इनेलो नेता ओंकार सिंह और मक्खन सिंह लबाना ने कहा कि सैलजा ने अम्बाला के लोगों को न सिर्फ चौंकाया है, बल्कि राजनीति में बने रहने के लिए जो शॉर्ट कट अपनाया है, वह गलत है। संभावित हार से बचने के लिए पिछला दरवाजा चुना है। अब अम्बाला के लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि बाहर के नेता को लाने का सबब क्या होता है। इधर, नारायणगढ़ विधायक रामकिशन गुर्जर, संजय सेठी व विभोर बतरा का कहना था कि हाईकमान के पास निश्चित रूप से कोई उम्मीदवार होगा, इसलिए यह निर्णय लिया है। हम हाईकमान के साथ हैं।
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