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डाउनलोड करेंअम्बाला सिटी. अफसरों की कोलोनी के नजदीक जो हर्बल पार्क है उसमें सुबह- शाम टहलने पर ताजगी का नया एहसास होता है। दूर-दूर तक फैली हरियाली आंखों को भाती है। बड़ा सुकून मिलता है। क्योंकि इस पार्क में अफसर व उनके बच्चे टहलते और खेलते-कूदते नजर आते हैं। जबकि एक ऐसा ही पार्क शिवालिक कॉलोनी में भी है, इसका नाम भी हर्बल पार्क है, लेकिन हर्बल तो क्या यहां हरियाली को ही ग्रहण लग रहा है।
अफसर जहां रहते हैं वहां ज्यादा शोर-शराबा नहीं है। माली भी 24 घंटे इस पार्क की देखभाल में पसीना बहाते हैं। मजाल है कि वहां कूड़ा-कर्कट नजर आ जाए और पौधे सूख जाएं। सुबह-शाम माली पौधों को पानी की कमी महसूस नहीं होने देते। पार्क में जैतून है तो कई तरह की तुलसी के पौधे, एलोवेरा, क्रोटन, नीम, आदि पौधे लगे हुए हैं। कूड़ा फेंकने के लिए डस्टबिन भी लगे हैं। नगर निगम के कर्मचारी नियमित रूप से कचरा ले जाते हैं। दूसरी तरफ शिवालिक कालोनी के हर्बल पार्क का नजारा देखिए।
पार्क में घुसते ही पॉलीथिन, प्लास्टिक के गिलास मिलेंगे। यह उन शराबियों के होते हैं जो रात में जाम छलकाने के बाद वहीं फेंक जाते हैं। लोग कुत्तों को घुमाने के लिए इसी पार्क में लाते हैं। उन्हें कोई नहीं रोकता। कुत्ते भी गंदगी पार्क में ही करते हैं। अफसरों वाले पार्क की देखरेख का जिम्मा वन विभाग और शिवालिक पार्क की देखरेख की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है।
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