अम्बाला. अन्नापूर्णा टेंट हाउस का मालिक अरुण विग अपनी ही रची साजिश में फंस गया। उसने एक शख्स को झूठे केस में फंसाने की साजिश रची थी लेकिन जांच के दौरान वारदात का सच सामने आ गया। अपनी एक्टिवा पर गोली चलवाने के लिए अरुण विग ने शिवप्रताप नगर के सचिन शर्मा को हायर किया था। देसी पिस्तौल खरीदने के लिए 15000 रुपए भी दिए थे। सचिन के पकड़े जाने के बाद साजिश की पोल खुल गई। अब पुलिस आरोपी अरुण विग को जल्द ही गिरफ्तार करने की बात कह रही है। वारदात में इस्तेमाल पिस्तौल को जब्त करने के लिए अब पुलिस ने सचिन को तीन दिन के रिमांड पर लिया है। उसने गोली चलाने का जुर्म भी कबूल लिया है।
खड़ी एक्टिवा पर चलाई गई गोली : एक्टिवा पर गोली चलने की वारदात 16 अगस्त 2014 को हुई थी। तब अपूर्णा टेंट हाउस के मालिक अरुण विग ने सुधीर वर्मा व उसके दोस्त पर गोली चलाने का आरोप लगाया था। उसने बताया था कि जब वह अपने दोस्त राकेश कुमार के घर जा रहा था। तभी पीले रंग की मोटरसाइकिल पर सवार होकर दो युवक आए थे। विग ने बताया कि तभी उस पर गोली चलाई गई। तब विग ने गोली एक्टिवा पर लगने की बात कही थी। उसने भागते समय सुधीर पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया था। उधर, आरोपों को लेकर सुधीर ने भी सफाई दी थी। उसने कहा था कि विग उसे झूठे मामले में फंसाने की साजिश रच रहा है।
दो केसों से छुटकारे के लिए साजिश
आरोपी अरुण विग पर सुधीर वर्मा की बहन ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। तब पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज किया। बाद में सुधीर वर्मा के रिश्तेदार वीरेंद्र ने विग के खिलाफ दिल्ली में जान से मारने की धमकी देने के आरोप में केस दर्ज करवाया था। विग दोनों केसों से बेहद परेशान था। हर हाल में वह इन केसों से छुटकारा चाहता था। तभी उसने सुधीर वर्मा को झूठे केस में फंसाने की योजना बनाई। इसके लिए सचिन शर्मा को साजिश में शामिल किया गया। एक होटल में दोनों की मुलाकात हुई। यहीं पिस्तौल खरीदने के लिए सचिन को 15 हजार रुपए दिए गए। साथ ही 50 हजार रुपए देने का भी लालच दिया गया। घटनास्थल पर एक्टिवा खड़ी कर दी गई। तब विग वहां नहीं था। गोली चलाकर सचिन वहां से खिसक गया। बाद में विग ने गोली चलाने का शोर मचा दिया। जांच के बाद पुलिस को मौके से गोली का आधा खोल भी मिला था।
अब आगे क्या: 2 से 10 साल की सजा संभव
आरोपी के खिलाफ पुलिस भादंसं की धारा 195 के तहत केस दर्ज करेगी। एडवोकेट सुनील आनंद ने बताया कि जुर्म साबित होने पर ऐसे मामलों में 2 से 10 साल तक के कारावास का प्रावधान है। अगर जुर्म में किसी गहरी चोट का जिक्र हो फिर 14 साल तक की कैद संभव है। इस मामले में पुलिस अरुण विग के खिलाफ भी इस जुर्म के तहत ही केस दर्ज करेगी। पुलिस की मानें तो शुरूआती जांच में ही अरुण विग की नीयत पर शक हो गया था। तभी जांच में नया मोड़ आ गया।
3 दिन में सुलझी वारदात
हाईप्रोफाइल मामले की गुत्थी पुलिस ने तीन दिन में सुलझा ली। जांच पिछले एक महीने से कई स्तर पर हो चुकी थी। मगर असली आरोपी बेनकाब नहीं हो पाए। फिर एसीपी नारायणगढ़ मुकेश मल्होत्रा की अगुवाई में एसआईटी बनाई गई। इसमें सब इंस्पेक्टर कुलवंत व एसएचओ साहा अजैब सिंह को शामिल किया गया। 13 सितम्बर को इस पर जांच शुरू हुई। 16 सितम्बर को आरोपी सचिन शर्मा को पकड़ लिया गया।
सचिन ने उगला सच
शुरुआती जांच में ही विग के आरोप झूठे पाए गए थे। जांच के दौरान सचिन ने पूरा सच उगल दिया। नि:संदेह विग दो केसों में छुटकारा चाहता था, इसीलिए उसने सुधीर वर्मा को फंसाने की साजिश रची। पर वह अपनी ही साजिश में फंस गया। उसे जल्द ही काबू किया जाएगा।
- अजय सिंघल, पुलिस कमिश्नर, अम्बाला।