अम्बाला. बोह के साथ लगते आनंद नगर व दुग्र्याना कॉलोनी के लगभग 250 परिवार अजीब संकट में हैं। घरों के सामने के रास्ते को सेना अपनी जमीन बता रही है। इतना ही नहीं सेना ने कई घरों के अंदर तक निशानदेही की बुर्जी गाड़ रखी है। मुसीबत यह भी है कि इन घरों के पीछे गहरा नाला बह रहा है। लोगों को डर है कि सेना ने जमीन पर कब्जा ले लिया तो उनके लिए आगे कुआं पीछे खाई जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। क्योंकि लोगों के लिए न तो रास्ता बचेगा और न ही कोई विकल्प है।
इसी सिलसिले में शुक्रवार को वार्ड-12 पार्षद जरनैल सिंह माजरा व अन्य लोगों ने सेना व प्रशासन को मौके पर बुलाकर अपनी व्यथा सुनाई। सेना के ब्रिगेडियर आशीष उप्पल व डीसी केएम पांडुरंग मौके पर थे। इन अफसरों ने लोगों को जमीन पर कब्जा करने से पहले निशानदेही कराने की बात कहकर राहत दी है।
लोगों में डर, सेना आई तो कहीं के नहीं रहेंगे : सेना ने 15 जनवरी को आनंद नगर-ए, बी व बाबा बालक नाथ मंदिर के सामने से अवैध कब्जे हटाए थे। सेना का मकसद दुग्र्याना कॉलोनी और दलीपगढ़ में सेना की जमीन पर कब्जा जमाए लोगों को हटाना था।
सेना के एक दस्ते ने लोगों के घरों से लेकर उनके बगीचों तक अर्थमूविंग मशीन चलवा दी थी। हालांकि, स्थानीय प्रशासन के साथ गए सेना के दस्ते को इस कार्रवाई को लेकर विरोध भी झेलना पड़ा था। इसके बाद आर्मी का दस्ता लौट गया था। लोगों में डर है कि सेना दोबारा आई तो वे कहीं के नहीं रहेंगे।