अम्बाला. शहरी क्षेत्र में इतना नहीं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हड़ताल का खासा असर हुआ है। इधर, बिजली गई और उधर बारिश आ गई। पिछले साल भी बिजली ने खूब रुलाया था। बदले में ग्रामीणों ने भी उठक-बैठक लगवा दी थी। इस बार बारिश ने रोक लिया। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली गुल करना शरारत है। यदि बारिश न होती वे शरारतियों को मजा चखाते। बिजली निगम का रजिस्टर ही बता रहा है कि ग्रामीण इलाकों में ५३ फीडर फेल हो गए थे।
बिजली कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से ग्रामीण इलाकों के साथ शहरी क्षेत्रों में भी लोग परेशान हुए। एक के बाद एक कॉलोनी में बिजली गुल हुई। इस पर लोगों का कहना था कि जानबूझकर बिजली काटी जा रही है। कैंट के पंजाबी बाग, पालम विहार, राजिंद्रा पार्क, गांधी ग्राउंड, इंद्रपुरी व जनकपुरी आदि कॉलोनियों में बिजली गुल रही।
क्रॉस रोड, बैंक रोड, बब्याल सब डिवीजन में कामकाज ठप रखा। इन केंद्रों पर रोजाना करीब 200 शिकायतें दर्ज होती हैं, लेकिन मंगलवार को शिकायत रजिस्टर तक मौजूद नहीं था। कैंट में काम करने वाले 472 कर्मियों में से 401 कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे। केवल प्रोबेशनर कर्मचारियों के सहारे आपात व्यवस्था का जिम्मा था।
शहर की तुलना में ग्रामीण इलाको में परेशानी ज्यादा
नकटपुर गांव के रहने वाले निर्मल सिंह का कहना था कि बिजली कर्मचारियों का विवाद सरकार से है, जनता से नहीं। अपनी मांगें पूरी कराने का यह कोई तरीका नहीं है कि दूसरों को परेशान किया जाए। जब ये कर्मचारी ड्यूटी पर रहते हैं तब एक दिन में कई बार बिजली जाती है और ट्रांसफार्मर पर काम होता है। यहां तो हालत यह है कि जानबूझकर हमें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांव के लोग परेशान हैं।
यदि बारिश ने कदम नहीं रोके होते तो शरारतियों को सबक सिखाते। सुल्लर के कुलविंह सिंह, मानकपुर के गुरविंद्र सिंह ने कहा कि अफसरों को ग्रामीण क्षेत्रों का ध्यान रखना चाहिए। यदि हालात नहीं सुधरे और इसी प्रकार बिजली गुल रही तो उन्हें सड़क पर आना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि अफसर शायद पिछले साल की उन घटनाओं को भूल गए हैं। बार-बार शिकायत करने के बाद भी ग्रामीणों को बिजली के लिए तरसाया जा रहा था। जब सब्र का बांध टूटा तो अफसरों को लेने के देने पड़ गए थे। इसी प्रकार ठाकर माजरी के अजब सिंह, राजेंद्र, और दलपत ने कहा कि बिजली कर्मियों की शरारत पर रोक लगाई जाए।