पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • The Shopkeepers Are Very Lgwate STREET Fdi

5000 के हिसाब से छह माह का एडवांस लेकर दुकानदार ही लगवाते हैं रेहड़ी-फड़ी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अम्बाला। एडवोकेट एसकेएस बेदी की 3 साल से चल रही कार्रवाई अपने मुकाम तक पहुंचना तो दूर अब उस मुहिम का न तो जिला प्रशासन को कोई डर है, न ही दुकानदारों को कोई भय है। जिस सदर बाजार और बजाजा बाजार में 3 अप्रैल को प्रदेश में सबसे बड़े स्तर की अभी तक की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई को अंजाम दिया गया था, वहां अब रेहड़ी-फड़ी वालों का स्थाई अतिक्रमण हो गया है।
एक दिन पहले सर्राफा बाजार में हुई आगजनी की घटना के बाद भी प्रशासन जागने का नाम नहीं ले रहा है। मंडे मार्केट ताे अब कहने की ही रह गई अब तो सदर बाजार में रोजाना ही मंडे मार्केट सजती है।
दरअसल सदर बाजार और बजाजा बाजार के दुकानदार खुद इस अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं। इन फड़ी व रेहड़ी वालों से 5 हजार रुपए प्रति माह अपनी दुकानों के आगे स्थाई रूप से रेहड़ी-फड़ी लगाने के यह दुकानदार वसूल रहे हैं। ज्यादातर दुकानदार 6 महीनों का एडवांस इन फड़ी वालों से ले लेते हैं। लिहाजा रेहड़ी-फड़ी वाले भी बेखौफ होकर दुकानों के आगे स्थाई कब्जा जमाए हुए हैं। हालांकि जब आम आदमी अपनी बाइक भी इनकी दुकानों के आगे खड़ी कर दे तो यही दुकानदार उससे लड़ने लगते हैं।
निगम अफसरों पर भी चढ़ता है "चढ़ावा'
नाम न छापने की शर्त पर कुछ दुकानदारों ने बताया कि उन्होंने तो शुरू से ही मंडे मार्केट व रेहड़ी-फड़ी वालों का विरोध किया है लेकिन ज्यादातर दुकानदारों की आमदनी का जरिया यही रेहड़ी-फड़ी वाले बन गए हैं। उन्होंने बताया कि एक बार में रेहड़ी-फड़ी के एक हजार रुपए कम से कम तय हैं। यानी महीने में चार हजार। जो स्थाई रूप से लगाना चाहते हैं उनसे 1 हजार अधिक और 6 माह का एडवांस ले लिया जाता है। इसी में से आधी से कम राशि नगर निगम के अफसरों को चली जाती है। इसी कारण निगम भी कार्रवाई नहीं करता।
मंडे को आग लग जाती तो...
गनीमत रही कि बुधवार को लगी आग सोमवार को नहीं लगी। यदि दुर्भाग्य से ऐसा हाेता तो खासे नुकसान के साथ जानी नुकसान कितना होता यह तो सोचकर भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं, लेकिन प्रशासन का मौन होना, इस बात का सूचक है कि उसे अभी बडे़ हादसे का ही इंतजार है।