यमुनानगर। अधिकारियों की लापरवाही के चलते गांव तिगरा में सुलगा विवाद गुरुवार को भी नहीं सुलझ सका। विवाद निपटाने के लिए अधिकारियों ने सदर यमुनानगर थाना में गांव के दोनों पक्षों की बैठक भी ली। इसमें गांव के सरपंच और जिला परिषद चेयरमैन के पति सहित दोनों पक्षों से पांच-पांच लोगों मौजूद रहे।
सुबह 11 बजे से शुरू हुई बैठक दोपहर तीन बजे तक चलती रही। इसमें डीसी मंदीप सिंह बराड़ और एसपी शशांक आनंद ने दोनों पक्षों के लोगों को शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर तरह से मनाने का प्रयास किया, लेकिन समझौता नहीं हो पाया। इस दौरान एक पक्ष वार्ता को बीच में छोड़ चला गया।
लेकिन बाद में गांव में शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए दस सदस्यों की पीस कमेटी का गठन किया। हालांकि कफ्र्यू में वीरवार को रोजमर्रा के काम में कुछ ढील दी गई, लेकिन स्थित तनावपूर्ण बनी रही। दूसरी ओर विवाद में पुलिस ने पांच एफआईआर की हैं। साथ ही कुल 106 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
सुबह से ही शांति व्यवस्था बनाने में जुटा प्रशासन
विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासन ने सुबह नौ बजे दोनों पक्षों के मौजिज लोगों के सामने वार्ता करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को एससी वर्ग के लोगों ने ठुकरा दिया। उनका तर्क था कि उन्हें कोर्ट से समन आया हुआ है वहां जाना है लेकिन प्रशासन ने उन्हें घरों से इस तरह बाहर जाने से मना कर दिया। इसके बाद प्रशासन ने करीब दस बजे वार्ता के लिए मना दिया। दोनों पक्षों के लोगों को कड़ी सुरक्षा के बीच गांव से सदर थाना में ले जाया गया।
मीटिंग से बाहर आते ही हंगामा
जैसे ही पीस कमेटी के सदस्य चुनने के लिए एससी बिरादरी के लोग मीटिंग से बाहर आए तो उनके पक्ष के लोग जिला परिषद की चेयरमैन रीना रानी के पति धर्मपाल पर भड़क गए। लोगों ने धर्मपाल पर आरोप लगाए कि वे प्रशासन का पक्ष कर रहे हैं।
देर शाम दोनों पक्षों में सुलह के आसार
वहीं, एसपी शशांक आनंद ने बताया कि देर शाम दाेनों पक्षों के लोगों ने लिखित आश्वस्त किया है कि गांव में किसी भी प्रकार का टकराव नहीं होने देंगे।
(फोटो- तिगरा गांव में कर्फ्यू के कारण सन्नाटा पसरा हुआ है।)