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बुढ़ापा पेंशन को लेकर आमने-सामने विधायक और मेयर, तेज हुई जुबानी जंग

7 वर्ष पहले
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अम्बाला सिटी। बुढ़ापा पेंशन को लेकर मंगलवार को लगे जाम की वजह से अब विधायक असीम गोयल व मेयर रमेश मल में जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस व हजपा के भी कई पार्षदों ने विधायक के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें पार्षदों को निकम्मा कहा गया था। बुधवार को मेयर ने चुनिंदा पार्षदों की मीटिंग बुलाई।
सक्षम नहीं मेयर-पार्षद: असीम
विधायक असीम गोयल ने फिर कहा कि पार्षद सक्षम ही नहीं हैं। अगर ये सक्षम होते तो लोग नाले-नालियों या फिर स्ट्रीट लाइट्स की समस्या लेकर उसके पास क्यों आते। इनकी काम करने की ही मानसिकता नहीं है। कांग्रेस राज में तो मेयर कभी धरने पर नहीं बैठे थे। अब ऐसी नौबत क्यों आ गई। हर पार्षद को अपने वार्ड के लोगों के पास जाना चाहिए। उनकी छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान कराना चाहिए। पर ये लोगों के पास जाते ही नहीं हैं। रही बात मेरे विदेशी दौरे की। उन्हें तो फख्र होना चाहिए। पूरे नॉर्थ इंडिया से मैं अकेला विधायक हूं जिसे चीन जाने का मौका मिला। मैं अपनी पार्टी का ईमानदार-कर्मठ कार्यकर्ता हूं। शहर का विधायक बाद में हूं। मेरा मकसद अम्बाला शहर को विकसित व भ्रष्टाचार मुक्त करना है। इसमें थोड़ा वक्त लगेगा लेकिन जनता को मेरा काम जरूर नजर आएगा।
हवाबाजी कर रहे विधायक: मल
मेयर रमेश मल ने कहा कि विधायक असीम गोयल ने हवाबाजी में उन पर झूठे आरोप लगा दिए। मल ने कहा कि गीता नगरी में बुजुर्गों को जाम लगवाने के लिए उन्होंने नहीं उकसाया था। न ही इसके लिए स्थानीय पार्षद दर्शना मेहता कसूरवार हैं। मल ने यह बात भी कही कि असलियत जाने बिना ही विधायक ने उन पर गलत आरोप लगा दिए। झूठे आरोप लगाने से जाहिर हो गया कि असीम शहर के गैरजिम्मेदार विधायक हैं। पार्षद दर्शना मेहता के बेटे राजेश मेहता ने कहा कि विधायक को पहले सच जानना चाहिए था। मेहता ने कहा कि विधायक को अब हर वार्ड में समय पर पेंशन बांटने व पेंशन के नए आवेदन लेने के लिए अफसरों की ड्यूटी सुनिश्चित करनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। बुजुर्गांे ने जब जाम लगाया तब भी संबंधित विभाग का कोई अिधकारी मौके पर नहीं आया। मेयर रमेश मल ने कहा कि विधायक कहते हैं कि उनके पास 70 फीसदी शिकायतें निगम से जुड़ी आ रही हैं। उन्हें ये शिकायतें प्रस्तावित मीटिंग में पार्षदों के सामने रखनी चाहिए ताकि सभी को सच्चाई मालुम हो सके। मौखिक तौर पर कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता।