अम्बाला। अम्बाला एक साल से ट्यूबवेल खराब है। मैं जून माह में कॉलेज में पदभार ज्वाइन किया तब भी ट्यूबवेल खराब पड़ा था। अभी भी ट्यूबवेल खराब है। बुधवार को पीजी कॉलेज में पूरा दिन पानी नहीं आया। मैंने पैसा खर्च कर पानी का टैंकर मंगवाया तब कहीं जाकर विद्यार्थी और स्टाफ ने पानी पिया। पब्लिक हेल्थ विभाग के कर्मचारी कह रहे हैं जल्द ही ट्यूबवेल ठीक करा दिया जाएगा। पांच-दस हजार रुपए की बात होती तो अपनी जेब से लगा देता। इसमें काफी पैसे का खर्च है। दोबारा बोरिंग करनी पड़ेगी तब जाकर कहीं पानी मिल पाएगा। पीजी कॉलेज में एक साल से हो रही पानी की दिक्कत को कुछ यूं बताया कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ.
मनमोहन सिंह ने।
कॉलेज का ट्यूबवेल कई महीनों से खराब होने से विद्यार्थियों और स्टाफ के सामने भारी पेयजल संकट खड़ा हो गया है। आलम यह है कि शुक्रवार को अपना मुद्दा संघर्ष समिति के पदाधिकारी और सदस्यों ने प्रिंसिपल डॉ. मनमोहन सिंह से मुलाकात की तथा शिकायत पत्र डीसी और पब्लिक हेल्थ एक्सईएन को सौंपा।
हालात सुधरने की नहीं कोई आस
मामले में पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मनमोहन सिंह ट्यूबवेल ठीक कराने में खर्च होने वाले पैसे का जिम्मा पब्लिक हेल्थ विभाग के सिर मढ़ रहे हैं, वहीं पब्लिक हेल्थ विभाग प्रिंसिपल के सिर पर। अगर मामला ऐसा ही रहा तो कॉलेज स्टाफ आैर विद्यार्थियों के सामने लंबे समय तक पेयजल का संकट बरकरार रह सकता है। अपना मुद्दा संघर्ष समिति के सदस्य अमर आर्य व आशीष पासी ने बताया कि कॉलेज में विद्यार्थियों और स्टाफ के समक्ष पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। जब पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की गई तो पता चला कि कॉलेज को ट्यूबवेल को ठीक कराने का खर्च पब्लिक हेल्थ में जमा कराना होगा तब विभाग ट्यूबवेल को ठीक करने का काम शुरू करेगा।
नहीं ठीक हुआ तो करेंगे आंदोलन
अमर आर्य और आशीष पासी ने कहा कि पब्लिक हेल्थ विभाग और कॉलेज प्रिंसिपल दोनों से समिति के पदाधिकारी और सदस्यों ने मुलाकात कर मामले की पूरी पड़ताल की है। हमारा उद्देश्य सिर्फ यह है कि कोई भी विद्यार्थी अथवा स्टाफ पूरा दिन कॉलेज में पानी के लिए न भटके। इस परेशानी को दूर करने में कॉलेज प्रशासन और विभाग बिना देरी पहल करे। हर हाल में कॉलेज में पेयजल संकट दूर होना चाहिए। जल्द ही समस्या का हल नहीं हुआ तो संबंधित कॉलेज प्रशासन/विभाग/अधिकारी के खिलाफ सड़क पर उतर आंदोलन किया जाएगा।
पैसा विभाग को जमा कराना होगा
^यह काम मैकेनिकल डिविजन को करना है। लिहाजा एस्टीमेट बनाकर इसका पैसा विभाग को जमा कराना होगा। इसके साथ ही इसका काम शुरू हो जाएगा। वैसे मामले पर मैं पूरी नजर रखे हूं। कॉलेज में जलापूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी।
एसके नागपाल, एक्सईएन पब्लिक हेल्थ विभाग अम्बाला कैंट
2500 विद्यार्थी झेल रहे किल्लत
कॉलेज में करीब 2500 विद्यार्थी और 100 के करीब स्टाफ जिनमें प्राध्यापक/ क्लेरिकल व चतुर्थ श्रेणी शामिल हैं पठन-पाठन व अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कॉलेज में एक साल से ट्यूबवेल खराब होने से इन सभी के समक्ष पानी का गहरा संकट खड़ा हो गया है।