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हर माह खुद के खर्च कर रहे सवा करोड़ रुपए, इलाज फिर भी दूसरे की मर्जी से

7 वर्ष पहले
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अम्बाला। खुद के पैसे लेकिन इलाज दूसरे की मर्जी का। सुनकर शायद आप चौक जाएं लेकिन अम्बाला जिले में करीब 1 लाख 26 हजार लोगों के साथ ऐसा ही सलूक किया जा रहा है। इलाज के लिए करोड़ों रुपए हर माह खर्च हो रहे हैं। बावजूद इसके छोटे से बड़े अफसरों सभी ने चुप्पी साध रखी है। जी हां कुछ ऐसा ही बर्ताव किया जा रहा है अम्बाला जिले के ईएसआई कार्ड धारकों के साथ।
विडंबना देखिए हर माह जिले में 25 हजार 217 कार्ड होल्डर करीब 500 रुपए अपने वेतन से कटवा रहे हैं। लेकिन इलाज के लिए फिर भी सिर्फ और सिर्फ सिविल अस्पताल पर ही डिपेंड हैं। चूंकि डिस्पेंसरियों में इलाज नहीं होने पर डाॅक्टर मरीज को सिविल अस्पताल में भेज देते हैं। सवाल यह उठता है कि जब इलाज ही सिविल अस्पताल में कराना है तो फिर हर माह सवा करोड़ रुपए क्यों जाया किए जा रहे हैं। जब इस बारे में भास्कर टीम ने ईएसआई के प्रमुखों से बात की तो सभी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर पल्ला-झाड़ते दिखे।

किसी को नहीं मिल रही कैश-लैस इलाज की सुविधा: नियमानुसार 25 हजार या इससे अधिक आईपी होने पर जिले में एक मेडिकल कॉलेज होना चाहिए या फिर एक ऐसा अस्पताल जहां ईएसआई कार्ड धारकों व उनके आश्रितों काे कैश-लैस इलाज की सभी सुविधाएं मिल सकें।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 25 हजार 217 आइपी हैं। लेकिन इसे जिले का दुर्भाग्य कहें या विभाग के अफसरों की लापरवाही जिले में न तो ईएसआई का कोई मेडिकल अस्पताल है न ही किसी अस्पताल से टाइअप किया गया है, जहां मरीजों का कैश-लैस इलाज हो सके।

विज से ही है अब आस
अम्बाला के स्वास्थ्य मंत्री के पास ही ईएसआई विभाग होने से अब जिले के लाखों लोगों को विज से आस है। अनिल विज से जब पूरे मामले के बारे में भास्कर टीम ने बात की तो उन्होंने कहा कि अब इस मामले में लापरवाही वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। पूरे मामले की तहत तक जाकर ईएसआई कार्ड धारकों को राहत दिलाई जाएगी। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
भास्कर: नॉलेज- बेसिक का 6.5% ईएसआई को
कर्मचारी व उनके आश्रितों को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना शुरू की हुई है। कर्मचारियों की बेसिक का कुल साढ़े 6 प्रतिशत ईएसआई को जाता है। इसमें से 4.5 फीसदी कंपनी और 1.5 फीसदी वेतन कर्मचारी को अपनी बेसिक वेतन का देना होता है। बदले में कर्मचारी व उसपर आश्रितों को ईएसआई से मुफ्त इलाज व बीमे की सुविधा मिल जाती है।
10 या इससे अधिक कर्मचारी जिस कंपनी/ संस्था में काम करते हैं उसे अपने कर्मचारियों को ईएसआई की सुविधा देनी होती है। प्रदेश में फिलहाल 15 प्राइवेट नामी अस्पतालों के साथ ईएसआई का टाइअप है लेकिन इनमें से 5 अस्पताल फरीदाबाद और 8 गुड़गांव में ही हैं। शेष प्रदेश के तीन ही जिलों में टाइअप वाले 3 अस्पताल हैं। प्रदेशभर में ईएसआई की 84 डिस्पेंसरियां हैं। ईएसआई के तहत मेडिकल बेनीफिट लेने के लिए कम से कम 90 दिन को संस्था/ कंपनी में कर्मचारी का काम होना चाहिए। जिले में धूलकोट, महेश नगर और अम्बाला सिटी तीन ईएसआई डिस्पेंसरी हैं।
25 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए अस्पताल
25 हजार से अधिक आईपी होने पर जिले में 25 किलोमीटर के दायरे में एक ऐसा अस्पताल होना चाहिए जिसके साथ ईएसआई ने टाइअप किया हो। अम्बाला में मुलाना मेडिकल कॉलेज में ईएसआई कार्ड धारकों का इलाज तो हो जाता है लेकिन यह अस्पताल 30-35 किलोमीटर के दायरे में हैं। यहां इलाज के लिए पहले मरीज को पैसे देने पड़ते हैं जोकि ईएसआई के नियमों के खिलाफ है।
आईपी, वीआईपी का है स्लोगन

ईएसआई का स्लोगन है कि आईपी, वीआईपी। यानी ईएसआई कार्ड धारक उसके लिए वीआईपी के समान हैं। उनका इलाज भी वीआईपी की तरह होगा। लेकिन सिविल अस्पताल में जिस तरह ईएसआई कार्ड धारकों को भेजा जा रहा है उससे यह स्लोगन सिवाय भद्दे मजाक के कुछ नहीं लगता। आज तक अम्बाला की तीनों ईएसआई डिस्पेंसरी में पीने के स्वच्छ पानी तक की व्यवस्था नहीं है। लाख जतन के बावजूद किसी भी डिस्पेंसरी में आरओ तक नहीं लग सका।
क्या कहना है अफसरों का
^मैं इस बारे में अपने अफसरों को कई बार रिमांइडर भेज चुका हूं। उम्मीद है कि जल्द ही आरओ लग जाएगा। टाइअप करने के बारे में हमारे अफसर ही बता सकते हैं।
डॉ. अशोक, ईएसआई, कैंट।
^इस मामले में फरीदाबाद ईएसआईसी ऑफिस वाले ही कुछ कर सकता है मेरे हाथ में कुछ नहीं है।
डॉ. पाल, ईएसआईसी फरीदाबाद
^यह मामला मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। टाइअप कराना या मेडिकल अस्पताल बनाना अब ईएसआईसी के हाथ में ही है। जहां तक आरओ की बात है तो यदि डिस्पेंसरी के डॉक्टर लिखकर दें तो मैं अपने स्तर पर इसे करा दूंगा।
डाॅ. नरेंद्र कालिया, डायरेक्टर ईएसआई।