पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अमेरिकियों को भाया हमारा बासमती, 600 ट्रक चावल का ऑर्डर देने भारत आई महिला

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
करनाल. अमेरिका में अब भारतीय बासमती की डिमांड ज्यादा बढ़ रही है और वहां के लोग थाईलैंड के टिल्डा चावल के बजाय भारतीय बासमती चावल को अधिक पसंद करने लगे हैं। पिक्सी कंसल्टिंग सोल्यूशन लिमिटेड की ओर से सेक्टर-12 हुडा ग्राउंड में लगाई राइस प्रदर्शनी में विदेशी बड़ी तादाद में चावल खरीदने आ रहे हैं।

प्रदर्शनी के अंतिम दिन सैंपल देखने अमेरिका से आई रक्षा सहगल ने बताया कि अमेरिका में बासमती खाने वालों की तादाद बढ़ रही हैं। पिछले दो साल से अमेरिका में बासमती चावल प्रसिद्ध हुआ है। इस तरह से भारतीय चावल उद्योग के अमेरिका में फलने-फूलने के चांस अच्छे हैं। सहगल 6 पाउंड मीट्रिक टन अर्थात 600 ट्रक चावल खरीदने के उद्देश्य से प्रदर्शनी में हिस्सा लेने आई हैं। उन्होंने कंपनियों से सेंपल लिए हैं। चावल की सभी किस्मों को देखने के बाद राइस के लिए ऑर्डर करेंगी। अमेरिका में सेवन सीज्स एलएलसी इंटरनेशनल सेल्स एंड मार्केटिंग में इंटरनेशनल डायरेक्टर रक्षा सहगल ने बताया कि उनकी कंपनी पॉपकॉर्न भी बनाती है। 40 वर्षों से अमेरिका में बसी हुई हैं। सरकार ने यहां के किसानों को बेहद सुविधाएं दी हैं लेकिन अभी किसानों को ट्रेनिंग की जरूरत है। भारत में फार्मर स्कूल खोले जाने चाहिए। पेस्टीसाइड के इस्तेमाल को लेकर भारतीय किसानों को ट्रेंड करने की जरूरत है। भारत चाहे तो अमेरिका के सहयोग से फार्मर स्कूल संचालित कर सकता है।
विदेश में रहकर भी हिंदी से मोह
सहगल ने बताया कि उनका परिवार दिल्ली में रहता है। वे दिल्ली आते जाते हैं लेकिन अमेरिका में उन्होंने हिंदी से नाता नहीं तोड़ा है। घर में वे हिंदी में बोलती हैं और भारतीय खाना बनाती है। उनके बच्चे भी हिंदी पूरी तरह से समझते हैं।