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लूट की योजना बनाते पकड़े थे राजबीर के हत्यारे

7 वर्ष पहले
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प्रह्लादगढ़निवासी राजबीर हत्याकांड को सुलझाने में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसका कारण यह था कि राजबीर के परिजन इस मामले में निवर्तमान सीपीएस रामकिशन फौजी और राजबीर के दोस्त खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर विनोद पर उंगली उठा रहे थे। इसको लेकर प्रह्लादगढ़ गांव में कई बार पंचायतें हुई और हर बार इसमें फौजी वह विनोद पर कार्रवाई की मांग उठी। इसके अलावा लोगों ने इस मामले में रोड जाम तक भी किया था। मगर पुलिस अपने स्तर पर काम कर रही थी। जब यह मामला सदर थाना पुलिस से नहीं सुलझा तो तत्कालीन एसपी सतीश बालन ने यह मामला सीआईए के हवाले कर दिया।

इस पर सीआईए के तत्कालीन इंचार्ज जगत सिंह मोर की टीम इस मामले को ट्रेस करने में लग गई। इसी दौरान शहर और आसपास के क्षेत्र में लूटपाट की घटनाएं बढ़ने लगी तो पुलिस ने जिले में चौकसी बढ़ा दी। इस दौरान सीआईए के हाथ भागवी सुनील उर्फ शीशा और ब्रजवासी कॉलोनी निवासी कृष्ण 23 अप्रैल 2012 को लूट की योजना बनाते हाथ गए। जब पुलिस ने इन दोनों से पूछताछ की तो उन्होंने यह भी बता दिया कि प्रह्लादगढ़ निवासी राजबीर की हत्या को भी अंजाम दिया है। उनके इस खुलासे के बाद पुलिस की बांछें खिल गई थी। इसका मुख्य कारण यह था कि राजबीर हत्याकांड दिनोंदिन राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा था। वहीं पुलिस को इस मामले में कहीं कोई सुराग नहीं मिल रहा था। दूसरी ओर सीपीएस रामकिशन फौजी भी उन दिनों चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती हो गए थे। इसलिए लोगों का आरोप था कि फौजी ने इसी मामले से बचने के लिए ऐसा किया था।

पुलिस के हाथ आए इन दोनों बदमाशों ने बताया कि 20 मार्च को वे अपने दोस्त राजेश के साथ लूट के इरादे से अपनी बाइक पर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने प्रह्लादगढ़ के पास तीन युवक शराब पीते दिखे तो उन्होंने लूट के इरादे से उन पर हमला किया था। जब उनके हमले के बाद दो युवक भाग गए तो वे वहां रहे विनोद के मोबाइल और उसकी बाइक लेकर वहां से फरार हो गए। मगर इससे पहले वे उनका मुकाबला करने वाले राजबीर पर छुरी से हमला कर उसे घायल कर चुके थे। इसके बाद उन्हें पता चला कि उनके द्वारा घायल किए राजबीर की मौत हो गई। पुलिस जांच में यह सामने आया कि उन दोनों युवकों का साथी डाबर कॉलोनी निवासी राजेश उस समय एक अन्य मामले में जेल में बंद था। इसलिए पुलिस ने उसे प्रोडक्शन वारंट पर लिया। इसका कारण यह था कि उस