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मृत युवक की पेंशन हड़पने वाले सरपंच को 3 साल कैद

6 वर्ष पहले
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देवरालानिवासी एक मृत विकलांग युवक की चार महीने की 1200 रुपये पेंशन के गबन के आरोप में गांव के सरपंच उमेद सिंह और मृतक के पिता कुलदीप को कोर्ट ने तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने दोनों दोषियों पर 1500-1500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला मंगलवार को जेएमआईसी गायत्री देवी की अदालत ने सुनाया है। तोशाम पुलिस ने 21 फरवरी 2013 को देवराला के सरपंच उमेद सिंह और गांव के अन्य व्यक्ति कुलदीप के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।

इस बारे में गांव के व्यक्ति राजबीर ने एसपी को एक शिकायत दी थी। इसमें उसने बताया था कि उसके गांव के विकलांग युवक सुरेंद्र सिंह की तीन जनवरी को 2012 को मौत हो गई थी। वह युवक समाज कल्याण विभाग से हर महीने 300 रुपये पेंशन लेता था। राजबीर ने आरोप लगाया कि सुरेंद्र की मौत के बाद भी गांव के सरपंच ने मृतक युवक के पिता कुलदीप के साथ मिलीभगत कर चार महीने की पेंशन राशि फर्जी अंगूठे लगाकर हड़पी। इस बारे में राजबीर ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी हासिल कर इसकी शिकायत कैरू चौकी में भी दी थी। मगर, वहां की पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो उसने 27 जनवरी 2013 को इसकी शिकायत एसपी से की। एसपी ने इस बारे में तोशाम पुलिस को आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए। एसपी के आदेश पर पुलिस ने देवराला के सरपंच उमेद सिंह और सुरेंद्र के पिता कुलदीप के खिलाफ धोखाधड़ी करने का केस दर्ज कर लिया। उसी मामले में कोर्ट ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया है।

कानूनी लड़ाई में निरक्षरता को नहीं आने दिया आड़े

मामलेकी शिकायत करने और गवाही देने वाला युवक राजबीर देवराला गांव का निवासी है। वह विकलांग होने के अलावा निरक्षर भी है। राजबीर की पैरवी करने वाले वकील संजय श्याेराण डांडमा ने बताया कि जिस समय राजबीर यह मामला लेकर उनके पास आया तब उसे अदालती प्रक्रिया की ज्यादा जानकारी नहीं थी। मगर, अब तो वह एक्सपर्ट की तरह बात करता है। अगर सभी लोग राजबीर की तरह जागरूक हों देश मेंे कुछ हद तक भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकता है। राजबीर ने कहा कि उसके पास पूरे सबूत हैं। वह हार नहीं मानने वाला।