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900 ग्राम के नवजात ने जीती जीवन की जंग

7 वर्ष पहले
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भिवानी। जाको राखे सांईया मार सके ना कोय, यह कहावत उस उम्मीद पर टिकी है, जिसमें आदमी जिंदगी की उम्मीद आखिरी सांस तक नहीं छोड़ता। ठीक इसी तरह भिवानी जिला के गांव सरल निवासी महिला की नवजात बच्चे के बचने की उम्मीद परिजन बिल्कुल छोड़ चुके थे, क्योंकि प्री मैच्योर(समय से पहले) पहले पैदा हुए इस बच्चे का सात माह में ही जन्म हो गया था। जन्म के समय नवजात बच्ची का वजन मात्र 900 ग्राम था। चिकित्सक भी कम वजन होने पर बच्चे के जिंदा रहने की उम्मीद कम ही मानकर चल रहे थे। मगर इस बच्चे की सेहत में आश्चर्यजनक रूप से सुधार आया और उसकी जान बच गई।
नहीं थी आस : भिवानी के सामान्य अस्पताल के नीकू वार्ड में 26 अगस्त को दाखिल कराई गई नवजात बच्चा अब जिंदगी की जंग जीत चुका है। नीकू वार्ड के इंचार्ज डा. चंदनलाल ने बताया कि चिकित्सकों ने बच्चे को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया था। मगर परिजनों ने इसे वहां ले जाने की बजाए यहीं पर रखकर इलाज की गुहार लगाई। डॉक्टरों को भी रहम गया और उन्होंने यह रिस्क उठाने की ठानी। डा. चंदन के अनुसार बच्चे का जन्म के समय वजन मात्र 900 ग्राम था। इसे यहां पर रखा गया और इसका इलाज शुरू कर दिया। देखते ही देखते बच्चे ने अपना वजन 900 ग्राम से एक किलो 140 ग्राम तक बढ़ा लिया।

सामान्य बच्चे का होता है ढाई किलोग्राम वजन : डॉ. चंदन
नीकूवार्ड के प्रभारी डा. चंदनलाल ने बताया कि सामान्य बच्चे का जन्म के समय 2 से ढाई किलोग्राम तक वजन होता है। जन्म के कुछ दिन तक बच्चे का वजन लगातार घटता जाता है और बाद में फिर अचानक वजन बढऩा शुरू हो जाता है। यह प्रक्रिया सामान्य रूप से बच्चे के विकास में सहायक होती है। मगर एक किलोग्राम से नीचे वजनी बच्चे की जिंदा रहने की उम्मीद बहुत कम होती है।

प्रत्येक दो घंटे में किया जाता है बच्चे का वजन : डॉ. एनके गर्ग
आरएमओडा. एनके गर्ग ने बताया कि नीकू वार्ड में दाखिल बच्चे का हर दो घंटे बाद वजन किया जाता है। ड्यूटी पर तैनात प्रत्येक नर्स को सख्त हिदायतें दी गई थी कि उनकी निगरानी में बच्चे का वजन किसी भी सूरत में कम नहीं होना चाहिए। विशेष देखभाल की बदौलत ही बच्चे का वजन बढ़ा है। इसकी सेहत में लगातार सुधार है।
26 अगस्त को हुआ था सामान्य अस्पताल में दाखिल, रेफर होने के बाद भी परिजनों ने नहीं तोड़ी थी अपनी उम्मीदें ।

सामान्य अस्पताल के नीकू वार्ड में बच्चे की जांच करते डॉ. चंदनलाल।