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मां-बाप दे सकते हैं ध्रुव प्रह्लाद जैसे संस्कार
हनुमानजोहड़ी मंदिर में शनिवार को श्रीमद्भागवत कथा का तीसरे चरण का आयोजन किया गया। शनिवार को सुखदेव आगमन एवं वामन अवतार का प्रसंग सुनाया गया। इस कथा में विशेष सान्निध्य बालयोगी महंत चरण दास का रहा। श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए कथा व्यास स्वामी पूर्णेंदू महाराज ने कहा कि व्यक्ति को जीवन में कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। क्योंकि अभिमान पतन की जड़ है। उन्होंने कहा कि समुंदर मंथन के दौरान देवताओं राक्षसों में अमृत को लेकर युद्ध छिड़ गया था। उसके बाद भगवान ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत का पान कराया। उस दौरान अमृतपान करने से कुछ समय देवताओं में भी अभिमान पैदा हो गया था। महंत चरणदास ने कहा कि ध्रुव प्रहलाद जैसे अच्छे संस्कार माता पिता से ही मिलते हैं। इस अवसर पर महंत ध्यान दास महाराज, एडवोकेट धीरज सैनी, महंत मंगल दास महाराज, महंत मातु नाथ, अशोक भारद्वाज, मनोज वशिष्ठ मौजूद थे।
हनुमान जोहड़ी मंदिर में कथा के दौरान पूजन करते महंत चरणदास अन्य।