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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में गवाही देंगे डॉक्टर
अबसरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों को गवाही के लिए कोर्ट में चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वे अब जिला मुख्यालय पर सामान्य अस्पताल में ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डॉक्टर कोर्ट में गवाही दे पाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के इस कदम से सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को भी फायदा मिलेगा, क्योंकि अब डॉक्टर कोर्ट में गवाही देने का बहाना बनाकर ओपीडी आपात विभाग की सेवाओं से गायब नहीं रह पाएंगे।
कोर्ट में चिकित्सकों की गवाही की वजह से ओपीडी आपात विभाग के अलावा फील्ड की पीएचसी सीएचसी में मरीजों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता था। सबसे जरूरी आपात सेवाओं में तैनात चिकित्सक ही ज्यादातर अपनी काटी हुई एमएलआर में कोर्ट की गवाही देने जाते हैं। अगर दो से तीन घंटे भी चिकित्सक आपात विभाग को छोड़कर इधर-उधर हो जाता है तो फिर मरीजों घायलों की लाइन लग जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने इन झंझटों से छुटकारा पाने के लिए ही यह कदम उठाया है।
हर माह होती है 150 चिकित्सकों की गवाही
हरमाह कोर्ट में करीबन 150 डॉक्टरों को गवाही के लिए जाना पड़ता है। एक चिकित्सक को माह में तीन से चार बार भी कोर्ट में जाना पड़ सकता है। चिकित्सक अपनी ड्यूटी टाइम में ही कोर्ट गवाही का समय भी गिनाते हैं। इससे नुकसान केवल मरीजों का ही होता है। नई व्यवस्था से इस तरह के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी।
एनआईसी के जरिए होगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग : पूनिया
सिविलसर्जन डा. रणदीप पूनिया ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोर्ट में गवाही का कार्य एनआईसी के माध्यम से किया जाएगा। सरकार द्वारा अधिकृत कंपनी के जरिए ही जिला सामान्य अस्पताल के कांफ्रेंस हाल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जोड़कर डॉक्टरों की गवाही यहीं से देने की व्यवस्था जल्द पूरी हो जाएगी। इससे चिकित्सकों का समय बचेगा। इससे अधिक समय तक डॉक्टर ओपीडी आपात विभाग में मरीज देख पाएंगे।
दूसरे जिले में गवाही है तो मुख्यालय से ही चल जाएगा काम
अगरकिसी फील्ड के चिकित्सक की पीएचसी या सीएचसी में ड्यूटी है और उसकी किसी दूसरे जिले में कोर्ट की गवाही आती है तो उसे फिर जिला मुख्यालय पर वीडियो कॉन्फ्रेंस हाल में आने तक की जहमत उठानी पड़ेगी। जिला मुख्यालय से ही दूसरे जिले के कोर्ट में गवाही का काम चल जाएगा।
नहीं लगानी पड़ेगी मीटिंग के लिए भी चंडीगढ़ तक दौड़
स्वास्थ्यविभाग के