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बंद ट्रैफिक लाइट पर डीसी, नप सचिव डीएसपी कोर्ट में तलब

5 वर्ष पहले
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शहर की बंद पड़ी ट्रैफिक लाइटें आखिरकार क्यूं नहीं शुरू हो पा रही है, इसका जबाव अब यूटिलिटी कोर्ट मांगेगी। कोर्ट ने इसके लिए डीसी, नगर परिषद सचिव और डीएसपी हेडक्वार्टर को 23 फरवरी को कोर्ट में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। अधिवक्ता मुकेश गुलिया की याचिका पर कोर्ट ने तिथि निर्धारित की है। अधिवक्ता ने दायर की याचिका में बताया है कि लाखों रुपये की लागत से लगाई गई ट्रैफिक लाइटें बंद होने के कारण शहर के चार चौकों पर जाम लगा रहता है, जिससे लोगों का समय बर्बाद होने के साथ पर्यावरण भी दूषित होता है।

उल्लेखनीय है कि करीब तीन साल पहले शहरवासियों को नगर परिषद ने शहर के घंटाघर, हांसी गेट, चिड़ियाघर मोड़ और महम गेट चौक पर ट्रैफिक लाइट लगवाई थी। ट्रैफिक लाइटें लगने के बाद शहरवासियों के साथ-साथ राहगीरों को भी जाम की समस्या से निजात मिलनी शुरू हो गई थी। कुछ माह तक ट्रैफिक लाइटें ठीक-ठाक चलती रहीं, लेकिन उसके बाद लाइटें बंद हो गई। उसके बाद से कभी लाइट शुरू हुई तो कभी बंद। अब आलम यह हो चुका है कि पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से ट्रैफिक लाइटें बंद पड़ी हैं। लाखों रुपये से लगाई गई लाइटें शो पीस बनकर रह गई हैं। कुछ समय पहले तत्कालीन डीसी डाॅ. साकेत कुमार ने ट्रैफिक लाइटों को शुरू करवाने की बात कही थी, लेकिन उनका ट्रांसफर होने के साथ ही मामला एक बार फिर से ठंडे बस्ते में चला गया।

अधिवक्ता मुकेश गुलिया ने दायर की गई याचिका में बताया है कि जब शहर के चार चौकों पर ट्रैफिक लाइट लगी हुई है तो उनका प्रयोग क्यों नहीं किया जा रहा। उपरोक्त चौक शहर के सरकुलर रोड से जुड़े हुए हैं और सुबह के 10 बजते ही सरकुलर राेड पर जाम की स्थिति बननी शुरू हा़े जाती है। दोपहर तक आलम यह होता है कि हांसी गेट से घंटाघर का पांच मिनट सफर आधे घंटे में तय होता है। लोगों को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए और शो पीस बनी ट्रैफिक लाइट शुरू करवाने के लिए ही अधिवक्ता मुकेश गुलिया याचिका दायर की है।

उम्मीद है कि 23 फरवरी को कोर्ट के आदेश के बंद पड़ी ट्रैफिक लाइट फिर से शुरू हो जाएं।


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