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भावनाओं में विराजते हैं भगवान : गोपालदास

5 वर्ष पहले
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परमात्माके नाम को अपने भीतर से एक क्षण के लिए भी अलग नहीं करना चाहिए। केवल रामनाम का स्मरण करके ही साधक अपने मनोरथों को पूर्ण कर सकता है।

यह उद्गार श्री दादू पंथाचार्य श्रीश्री 1008 गोपालदास महाराज ने गुरुवार को पतराम गेट स्थित श्री दादू मंदिर में सत्संग कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए। महाराज गुरुवार को अपने दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत भिवानी पहुंचे थे। शहर में आगमन पर उनका पुष्प वर्षा गाजे-बाजे के साथ स्वागत किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं को रामनाम का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि राम नाम ही परमात्मा का प्रतिरूप है। परमात्मा को किसी ने देखा तो नहीं है पर इसकी अनुभूति राम नाम के माध्यम से हो सकती है। राम नाम से ही जीवन सुखद समृद्धिशाली हो सकता है और परा भक्ति में जीवात्मा समा सकती है।

इस अवसर पर महंत रामदत्त शास्त्री अलेवा, महंत दौलत राम, महंत रामनिवास मोखरा, महंत जगदीश सावड़, महंत मोहन दास समचाना, महंत सत्यनारायण पेटवाड़, महंत नारायण दास देवगुड़ा, महंत केशव दास पुठी, अखिल भारतीय श्री दादू सेवक समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला, दीन दयाल सिंघल, रघुनंदन सिंघल मौजूद थे।

श्रीदादू पंथाचार्य गोपालदास महाराज का स्वागत करते अशोक बुवानीवाला, मीनू बुवानीवाला अन्य श्रद्धालुगण।

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