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साफ किए पानी में पालेंगे मछलियां

6 वर्ष पहले
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{जमीन का पानी सूखने की वजह से ठप पड़ गया था मछली बीज उत्पादन

{ अब चार किस्मों की मछलियां पाली जाएंगी

भास्करन्यूज | भिवानी

अब वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पानी में मछलियों के चार किस्मों का बीज पनपेगा। मछली पालन विभाग ने पिछले दस सालों से बंद पड़े मत्स्य फार्म को फिर से चालू करने का खाका तैयार किया है। मत्स्य फार्म के लिए दादरी रोड स्थित पब्लिक हेल्थ के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। जमीनी पानी सूख जाने के बाद जल स्त्रोत के अभाव में फार्म को करीब एक दशक पहले बंद कर दिया गया था। तभी से लेकर मछली पालन विभाग का एकमात्र सरकारी फार्म में मछली बीज उत्पादन ठप पड़ गया था। जिले के सार्वजनिक जोहड़ों किसानों के लिए भी मछली का बीज बाहर से मंगवाना पड़ता है। इस फार्म के शुरू होने से एक फायदा यह होगा कि किसानों को मछली बीज के लिए दूसरे जिलों से महंगे दामों पर बीज नहीं लाना पड़ेगा। इतना ही नहीं फार्म में करोड़ों की संपत्ति का रखरखाव भी उचित संसाधनों की वजह से प्रभावित होने लगा था।

मछली पालन विभाग द्वारा यहां पर चार प्रकार की किस्म यानी नस्ल की मछलियों का बीज उत्पादन किया जाता है। इनमें रॉक, कत्ला, मुसक गोल्डन फिश शामिल हैं। ये मछलियां खारे पानी में ही फलती-फूलती हैं। भिवानी की भौगोलिक स्थिति के अनुरूप इनका यहां अच्छा खासा उत्पादन भी होता है।

हिसाररोहतक से आता है मछली का बीज

जिलेमें फिलहाल मछली पालन में लगे किसानों ग्राम पंचायतों के लिए हिसार रोहतक से मंगवाया जाता है। इसमें सरकारी और निजी एजेंसियों से ही मछली का बीज आता है। बीज को यहां लाने के लिए किसानों को काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। यहां पर मछली बीज उत्पादन शुरू होने के बाद उन्हें यहां सस्ता और आसानी से मछली का बीज मिल जाएगा।

सालों से बंद पड़े मत्स्य फार्म का क्षेत्रफल करीब 9 एकड़ में फैला हुआ है। नगर परिषद की हद में आने वाले इस फार्म में मछली बीज तैयार करने की तमाम सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन पानी का घोर अभाव है। यही वजह रही है कि इसमें बनाए गए तालाब लंबे अर्से से सूखे पड़े हैं। यहां के ट्यूबवेल भी खामोश हैं।

प्रपोजल भेजा है, जल्द ही शुरू होने की उम्मीद

जिलामत्स्य अधिकारी बलबीर कंबोज ने बताया कि फार्म को फिर से चालू करने का प्रपोजल विभाग को भेजा गया है। निदेशालय की टीम इसका सर्वेक्षण भी कर चुकी है। जल्द ही एस्टीमेट तैयार कर इसे चालू करने की उम्मीद है। फार्म में पानी की दिक्कत थी, इसे दूर कर दिया गया है। दादरी वाटर ट्रीटमेंट का पानी मछली बीज उत्पादन में इस्तेमाल किया जाएगा।

1991 में चालू हुआ था और 2003 में बंद

भिवानीमें मछली बीज उत्पादन फार्म 1991 में शुरू किया गया था। करोड़ों रुपयों की लागत से इसे तैयार किया गया था। लेकिन पानी के अभाव में इस फार्म को 2003 में बंद कर दिया गया था। तब से लेकर अब तक फार्म पर ताला लगा हुआ है और एक फिशरमैन ही यहां पर रखवाली के लिए छोड़ रखा है।

दादरी रोड स्थित मछली पालन विभाग के मछली बीज उत्पादन फार्म तालाब में पानी पहुंचाने का नाला जर्जर हो चुका है।

जर्जर हालत में है दादरी रोड स्थित मछली पालन विभाग का मछली बीज उत्पादन फार्म।