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जिले के पौने दो लाख बच्चों को कल खिलाएंगे एल्बेंडाजोल की गोलियां

6 वर्ष पहले
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जिलेके एक लाख 80 हजार 402 बच्चों को मंगलवार को राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस पर पेट के कीड़े मारने वाली टेबलेट एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी। इस दिन वंचित रहे बच्चों को 400 मिलीग्राम की यह टेबलेट 13 फरवरी को खिलाई जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर पर तैयारी पूरी कर ली हैं।

मंगलवार को देश में राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस मनाया जा रहा है। इसके तहत देश में छह से 19 साल तक के सभी युवाओं को स्वास्थ्य विभाग की ओर से पेट के कीड़े मारने वाली टेबलेट एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी। यह टेबलेट विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों, सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़़ रहे बच्चों और किसी कारण से पढ़ाई बीच में छोड़ आंगनबाड़ी केंद्रों में जा रहे बच्चों को खिलाई जाएगी।

बीमारबच्चों को गोली नहीं

यहगोली वैसे तो चूसी जाएगी और क्योंकि इसका टेस्ट कड़वा नहीं होता। मगर विभाग यह गोली उन बच्चों को नहीं खिलाएगा जो किसी किसी बीमारी से पीड़ित हैं। इस काम को सही तरीके से अंजाम देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के जिलाधिकारियों की सोमवार को बैठक होगी।

आशावर्करों का लेंगे सहयोग

इससमय जिले में 219 सब सेंटर हैं। इनमें हर सेंटर में तीन तीन स्वास्थ्यकर्मी कार्यरत हैं। इसलिए राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस पर ये स्वास्थ्यकर्मी अपना पूरा योगदान देंगे। इसके अलावा जिले के हर गांव कार्यरत आशा वर्कर से भी यह काम 100 प्रतिशत करने के लिए सहयोग लिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो इस टेबलेट का किसी तरह का साइड इफेक्ट नहीं है। इसलिए बच्चों में यह गोली लेने से किसी प्रकार का गलत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

फिर घर-घर का लक्ष्य

^मंगलवारको पूरे देश में राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस मनाया जा रहा है। इसके लिए हमने अपने स्तर पर पूरे जिले में छह से 19 साल के बच्चोंं की पहचान कर ली है। अगर मंगलवार को कोई बच्चा इस गोली को लेने से वंचित रह जाता है तो इस तरह के बच्चों को 13 फरवरी को घर घर जाकर यह खुराक खिलाई जाएगी।\\\'\\\' रणदीपपूनिया, सीएमओ, भिवानी।

एक लाख 80 हजार बच्चों की हो चुकी पहचान

कृमिनिवारण दिवस के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इस उम्र के एक लाख 80 हजार 402 बच्चों की पहचान की है। इनमें पहली से पांचवीं कक्षा के सरकारी स्कूलों में पढ रहे बच्चों की संख्या 72 हजार 437, छठी से 12वीं तक के बच्चों की संख्या एक लाख चार हजार 564, पढाई छोड़ आंगनबाड़ी केंद्रों में जा रहे एक हजार 566 के अलावा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ रहे 609 बच्चे शामिल हैं।